H1N1 मौसमी फ्लू, ICMR ने वैक्सीन को लेकर दूर किया भ्रम

    10-Sep-2026
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- पुरानी गाइडलाइन को नई एडवाइजरी बताकर रिपोर्टिंग पर जताई आपत्ति

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नई दिल्ली
। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मौसमी इन्फ्लुएंजा और H1N1 वैक्सीन को लेकर मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स पर स्पष्टीकरण जारी किया है। ICMR ने कहा कि कुछ रिपोर्ट्स में करीब दो महीने पहले जारी किए गए एक नोट को नई या हालिया एडवाइजरी के तौर पर प्रस्तुत किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। परिषद के अनुसार यह नोट चिकित्सा विशेषज्ञों और चिकित्सकों के लिए क्लिनिकल गाइडेंस के रूप में जारी किया गया था। इसमें मौसमी इन्फ्लुएंजा से संबंधित उपचार और बचाव को लेकर चिकित्सकीय दिशा-निर्देश दिए गए थे। ICMR ने स्पष्ट किया कि H1N1 कोई नया वायरस नहीं, बल्कि मौसमी इन्फ्लुएंजा का ही हिस्सा है और वर्तमान में इसके प्रसार को लेकर अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं है।

नॉर्दर्न हेमिस्फियर वैक्सीन को प्राथमिकता
ICMR के अनुसार मौसमी फ्लू के टीकाकरण के लिए Northern Hemisphere Vaccine को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, यदि यह उपलब्ध नहीं हो तो Southern Hemisphere Vaccine भी लिया जा सकता है। परिषद ने स्पष्ट किया कि दोनों वैक्सीन वर्तमान में प्रसारित H1N1 स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी हैं। साथ ही, मीडिया में किए गए उस दावे को भी खारिज किया गया है कि भारत में फ्लू वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ICMR के मुताबिक देश में उपयुक्त मौसमी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन, जिसमें Northern Hemisphere Vaccine भी शामिल है, प्रमुख फार्मेसियों के माध्यम से उपलब्ध हैं। वैक्सीन लेना स्वैच्छिक है और व्यक्ति अपनी जरूरत व चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इसे लगवा सकते हैं।

इन लोगों के लिए ज्यादा जरूरी टीकाकरण
ICMR ने कहा कि मौसमी इन्फ्लुएंजा का टीकाकरण विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें संक्रमण होने पर गंभीर बीमारी का खतरा अधिक रहता है। इनमें बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, किसी गंभीर बीमारी या अन्य सह-रुग्णता (comorbidities) से जूझ रहे लोग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति शामिल हैं। परिषद ने मीडिया संस्थानों से वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों को सही संदर्भ और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने की अपील की है, ताकि लोगों में अनावश्यक डर या गलतफहमी न फैले। ICMR ने बताया कि मौसमी इन्फ्लुएंजा वैक्सीनेशन से जुड़ी उसकी सिफारिशें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की लागू गाइडलाइन और वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित हैं।