'गूंगी गुड़िया' विवाद पर सियासत तेज, संजय राउत ने अमित शाह और पीएम मोदी को बताया 'गूंगा गुड्डा'

    05-Aug-2026
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मुंबई। महाराष्ट्र में 'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'गूंगा गुड्डा' करार दिया। बुधवार को मुंबई में आयोजित प्रेस वार्ता में राउत ने कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार अब तक जवाब नहीं दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और गृह मंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। राउत ने कहा कि जब सरकार जनता के सवालों पर मौन रहती है तो उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

'सुनेत्रा पवार से कानून-व्यव
स्था पर सवाल था, व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं'

संजय राउत ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र कांग्रेस की ओर से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के लिए इस्तेमाल किए गए 'गूंगी गुड़िया' शब्द का उद्देश्य व्यक्तिगत हमला करना नहीं था, बल्कि उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाना था। उन्होंने कहा कि बीड जिले की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर पत्रकारों ने सुनेत्रा पवार से सवाल पूछा था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। राउत के अनुसार, उस दौरान मंत्री धनंजय मुंडे ने उनके सामने से माइक अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने कहा कि यदि उसी स्थिति में कोई पुरुष मंत्री होता तो उसे 'गूंगा गुड्डा' कहा जाता। राउत का कहना था कि राजनीति में आलोचना को स्वीकार करना चाहिए और इसे महिलाओं या पुरुषों के सम्मान से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

'आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, इंदिरा गांधी भी सुन चुकी थीं ऐसी टिप्पणी'
राउत ने कहा कि 'गूंगी गुड़िया' या 'गूंगा गुड्डा' जैसे शब्द संसदीय परंपराओं के खिलाफ नहीं हैं और लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को आलोचना का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी कभी 'गूंगी गुड़िया' कहा गया था, लेकिन उन्होंने अपने काम और नेतृत्व से आलोचकों को जवाब दिया। राउत ने कहा कि मौजूदा सरकार में भी कई ऐसे मंत्री हैं जो जनता के सवालों का जवाब नहीं देते, इसलिए उनकी आलोचना होना स्वाभाविक है। उन्होंने दोहराया कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष या महिला-पुरुष के भेद का नहीं, बल्कि जवाबदेही और शासन व्यवस्था का है।

प्रिथ्वीराज चव्हाण ने भाषा पर जताई आपत्ति, सरकार से जवाब की मांग

इस पूरे विवाद पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी महिला उपमुख्यमंत्री के लिए इस तरह की भाषा के इस्तेमाल से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पहले से ही सीमित है, इसलिए सार्वजनिक संवाद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार है और मंत्रियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब दें। चव्हाण ने कहा कि बीड जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर जवाब मुख्यमंत्री और गृह विभाग को देना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा राजनीतिक संवाद की मर्यादा बनाए रखने की पक्षधर रही है और किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी जानकारी होना आवश्यक है।