सीसीएमपी के बाद बीएचएमएस डॉक्टरों के पंजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू

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नागपुर। शहर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) तथा इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेयो) में बुधवार से रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होने से ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो गईं। सेंट्रल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (सेंट्रल मार्ड) के आह्वान पर यह आंदोलन मंगलवार आधी रात से शुरू हुआ। डॉक्टरों का विरोध राज्य सरकार द्वारा सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) पूरा करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों का महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण किए जाने के प्रस्ताव को लेकर है। आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि जब तक इस मामले पर न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक पंजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों से जुड़े लंबे समय से लंबित अन्य मुद्दों के समाधान की भी मांग की है। सरकार द्वारा उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिए जाने के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दे दिया गया।
ओपीडी का बहिष्कार, लेकिन आपातकालीन सेवाएं जारी
हड़ताल के चलते दोनों सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया गया, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कैजुअल्टी, आईसीयू, ट्रॉमा सेंटर और गंभीर मरीजों के उपचार जैसी सभी आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जा रही हैं। मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वरिष्ठ प्राध्यापकों, एसोसिएट प्रोफेसरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों को ओपीडी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बावजूद रेजिडेंट डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण नियमित जांच, परामर्श और उपचार की प्रक्रिया धीमी पड़ गई, जिससे मरीजों की प्रतीक्षा अवधि बढ़ गई। अस्पताल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार से जल्द वार्ता की मांग
रेजिडेंट डॉक्टरों के समर्थन में मेडिकल इंटर्न भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं, जिससे अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर और अधिक असर पड़ा है। आंदोलनकारी डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करते हुए सरकार से तत्काल वार्ता शुरू करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द बातचीत शुरू नहीं की और मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। डॉक्टरों का दावा है कि उनका विरोध केवल पंजीकरण प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और रेजिडेंट डॉक्टरों के अधिकारों से जुड़े कई लंबित मुद्दों का समाधान भी आवश्यक है। ऐसे में अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित वार्ता पर टिकी हैं।