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पुणे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 22 अगस्त को पुणे में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुणे पुलिस ने मंजूरी दे दी है। हालांकि, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने आयोजकों के सामने 30 शर्तें रखी हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम स्थल की निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंच और पंडाल का निर्माण किसी मान्यता प्राप्त पेशेवर एजेंसी से कराने, मंच की संरचनात्मक सुरक्षा के लिए PWD प्रमाणपत्र लेने और सभी जरूरी अनुमति व NOC प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान किसी भी अप्रिय घटना के लिए आयोजक जिम्मेदार होंगे और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में पुलिस कार्रवाई भी कर सकती है।
चार गेट, महिला-पुरुषों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर कम से कम चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। पुलिस ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। साथ ही पुरुष और महिला दोनों वर्गों के पर्याप्त निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती अनिवार्य होगी। महिला और छात्राओं की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए आयोजकों को अधिक से अधिक महिला स्वयंसेवकों की तैनाती करने को कहा गया है। कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त रोशनी, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था करनी होगी। आग से सुरक्षा के लिए पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध रखने के साथ ही फायर विभाग से NOC लेना भी अनिवार्य किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय निवासियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा।
ड्रोन कैमरे और हाई-बीम लाइट पर प्रतिबंध
पुलिस ने कार्यक्रम के दौरान ड्रोन से फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। मंच के सामने D-Zone में बैरिकेडिंग करना भी अनिवार्य किया गया है। आयोजन स्थल पर आपत्तिजनक बैनर, पोस्टर, फोटो या अन्य सामग्री प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं होगी। आसमान की ओर हाई-बीम लाइट डालने पर भी रोक रहेगी। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए आयोजकों को जनरेटर की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान 24 घंटे CCTV कैमरे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पूरे परिसर की निगरानी की जा सके। पुलिस ने आयोजन से जुड़े सभी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
ट्रैफिक और इमरजेंसी रूट पर विशेष निगरानी
कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था करना और आसपास यातायात व्यवस्था बाधित न होने देना भी आयोजकों की जिम्मेदारी होगी। पुलिस वाहनों, एंबुलेंस और दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए **आपातकालीन मार्ग हर समय खुला** रखना होगा। कार्यक्रम निर्धारित समय पर शुरू और समाप्त करना होगा। आयोजकों को भीड़ बढ़ने, अव्यवस्था या ऐसी किसी स्थिति को रोकना होगा, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का भी पालन अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को होने वाली असुविधा को रोकने के लिए भी आवश्यक इंतजाम करने होंगे।
एयरपोर्ट अथॉरिटी-CISF की शर्तें भी लागू
पुलिस ने आयोजकों को Airport Authority और CISF की ओर से निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने के निर्देश भी दिए हैं। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस, एंबुलेंस और दमकल विभाग के वाहनों को तत्काल रास्ता मिलना चाहिए। महिला प्रतिभागियों और छात्राओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करना होगा। पुलिस के अनुसार कार्यक्रम के दौरान किसी भी अप्रिय घटना, भीड़ के बेकाबू होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में आयोजकों की जवाबदेही तय की जाएगी। इस तरह राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन 30 शर्तों के जरिए पुलिस ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, यातायात, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर आयोजकों की जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी हैं।