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नागपुर। वंदे मातरम् के पूरे छह अंतरे गाने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही भाजपा के लिए नागपुर में ही एक असहज स्थिति सामने आई। गुरुवार को नियोजन भवन, सदर में आयोजित नागपुर महानगरपालिका (NMC) की आमसभा में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे ही गाए गए। खास बात यह रही कि सदन में मौजूद भाजपा के किसी भी पार्षद ने इस दौरान इस कमी की ओर ध्यान नहीं दिलाया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब भाजपा का राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व कांग्रेस की कार्यसमिति द्वारा वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के फैसले पर लगातार सवाल उठा रहा है। संसद में हाल ही में वंदे मातरम् के पूरे छह अंतरों के गायन को संस्थागत रूप देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी संबंधित वंदे मातरम् विधेयक को मंजूरी दी है।
कानूनी संरक्षण के बीच हुई चूक
वंदे मातरम् के गायन को लेकर हाल में कानूनी प्रावधान भी सख्त किए गए हैं। Prevention of Insult to National Honour (Amendment) Act, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त को मंजूरी दी। इसके तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में कानूनी संरक्षण दिया गया है। जानबूझकर इसके प्रति अनादर करना, गायन रोकना या उसमें व्यवधान डालना दंडनीय अपराध हो सकता है। ऐसे में NMC की आमसभा में केवल दो अंतरे गाए जाने की घटना ने राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में NMC सचिव की ओर से पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि, घटना के बाद इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की बात सामने आई है।
‘पूरे गीत की जिम्मेदारी अधिकारियों की’
NMC में सत्तारूढ़ भाजपा के गुटनेता बल्ली बोरकर ने लोकसत्ता से बातचीत में कहा कि पूरा वंदे मातरम् बजाने की जिम्मेदारी अधिकारियों और कर्मचारियों की होती है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित जिम्मेदार लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर भाजपा कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के केवल दो अंतरे गाने को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर उसी पार्टी के नियंत्रण वाली NMC की आमसभा में भी केवल दो अंतरे गाए जाने से विपक्ष को भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि NMC प्रशासन इस चूक पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में पूरे गीत के गायन को सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।