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विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ही दिन में चार अलग-अलग बैंक खातों से अनधिकृत तरीके से रकम निकाल ली गई। चारों पीड़ितों ने पटामाता पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामलों को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। ट्रांजैक्शन के डिजिटल ट्रेल को खंगालने के लिए विजयवाड़ा सिटी साइबर क्राइम विंग की मदद ली जा रही है। चारों मामलों में ठगी का तरीका अलग था, लेकिन सभी में बैंक खातों से बिना अनुमति रकम ट्रांसफर की गई। पीड़ितों में रामवरप्पाडु निवासी नागराजू को फर्जी KYC अपडेट का मैसेज भेजकर APK फाइल इंस्टॉल कराई गई। निदामनूरु निवासी पाकलापति रविवर्मा को भी आधिकारिक संचार जैसा दिखने वाला संदेश भेजकर APK इंस्टॉल कराया गया। प्रसादमपाडु निवासी मनोज कुमार के खाते से अनधिकृत UPI ट्रांजैक्शन किए गए, जबकि नगरजुनानगर निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर राजेंद्र को SBI के रिवॉर्ड पॉइंट्स का लालच देकर फिशिंग लिंक भेजा गया।
फर्जी KYC के नाम पर APK इंस्टॉल, फिर फोन तक पहुंच
इन मामलों में दो पीड़ित APK आधारित साइबर अटैक** का शिकार हुए। आमतौर पर ठग SMS, WhatsApp या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसा संदेश भेजते हैं, जिसमें KYC समाप्त होने, बैंक खाता बंद होने या तुरंत वेरिफिकेशन कराने की चेतावनी दी जाती है। इसके साथ एक APK फाइल भेजी जाती है, जिसे कथित तौर पर KYC अपडेट या बैंक वेरिफिकेशन एप बताया जाता है। फाइल इंस्टॉल करने के बाद यह एप SMS, एक्सेसिबिलिटी सर्विस या फोन के अन्य संवेदनशील फीचर्स की अनुमति मांग सकता है। अनुमति मिलने पर ठग डिवाइस की गतिविधियों पर नजर रखने, OTP हासिल करने या दूसरे एप्स के साथ इंटरैक्ट करने की कोशिश कर सकते हैं। इस पूरे खेल में जल्दबाजी सबसे बड़ा हथियार होती है। खाता ब्लॉक होने की धमकी देकर पीड़ित को बैंक से स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने का समय नहीं दिया जाता।
रिवॉर्ड पॉइंट का लालच, रिटायर्ड बैंक मैनेजर भी फंसे
चौथे मामले में रिटायर्ड बैंक मैनेजर राजेंद्र को कथित तौर पर SBI रिवॉर्ड पॉइंट्स मिलने का संदेश भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्हें वास्तविक रिवॉर्ड प्लेटफॉर्म के बजाय एक फिशिंग पेज पर पहुंचाया गया, जिसका उद्देश्य बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करना था। साइबर अपराधी अक्सर रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और लॉयल्टी ऑफर को ठगी के लिए इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि तुरंत लाभ मिलने का लालच लोगों को बिना जांचे लिंक खोलने के लिए प्रेरित करता है। इस मामले की खास बात यह है कि पीड़ित बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अनुभवी व्यक्ति रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि साइबर ठगी के तरीके लगातार अधिक परिष्कृत हो रहे हैं और केवल तकनीकी जानकारी होना ही पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत और वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचना जरूरी है।
WhatsApp-SMS से आई APK से रहें सावधान
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि WhatsApp, SMS या Telegram के जरिए भेजी गई APK फाइल को कभी इंस्टॉल न करें। बैंकिंग एप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। KYC अपडेट, खाता बंद होने या रिवॉर्ड मिलने से जुड़े संदेशों में यदि तुरंत कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा हो तो उसे बड़ा रेड फ्लैग मानें। संदिग्ध एप इंस्टॉल हो गया है तो तुरंत इंटरनेट डिस्कनेक्ट कर बैंक से संपर्क करें और सुरक्षित डिवाइस से बैंकिंग क्रेडेंशियल बदलें। वित्तीय साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करना जरूरी है। जल्द रिपोर्ट करने से बैंक और जांच एजेंसियों को रकम रोकने या रिकवर करने की कोशिश में मदद मिल सकती है। पटामाता पुलिस के अनुसार चारों मामलों की जांच जारी है और कथित तौर पर ट्रांसफर की गई रकम से जुड़े बैंक खातों तथा डिजिटल चैनलों को ट्रेस किया जा रहा है।