हवा से ऊंचाई तक रोमांच, वर्षों की अड़चन के बाद पूरा होने की ओर प्रोजेक्ट

    20-Aug-2026
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नागपुर। विदर्भ के इकलौते हिल स्टेशन चिखलदरा में बहुप्रतीक्षित ग्लास स्कायवॉक अब निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गया है। नागपुर से करीब 230 किलोमीटर दूर स्थित चिखलदरा का यह स्कायवॉक पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनने की उम्मीद है। हरीकेन पॉइंट और गोरेघाट पॉइंट को जोड़ने वाला यह पुल मेलघाट टाइगर रिजर्व के बफर जोन क्षेत्र में बनाया जा रहा है। वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए परियोजना को लंबे समय तक विभिन्न नियामकीय अड़चनों का सामना करना पड़ा। सिंदखेड़ा और चिखलदरा वन प्रभागों के साथ अमरावती वन्यजीव विभाग से प्राथमिक मंजूरियां मिल चुकी हैं। जुलाई 2021 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से प्रक्रियात्मक स्तर पर हुई एक चूक के कारण भी परियोजना कुछ समय के लिए अटक गई थी। बाद में आवश्यक अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य फिर शुरू किया गया।

दो अंतिम मंजूरियों के बाद खुलेगा ग्लास फ्लोर
स्कायवॉक को पर्यटकों के लिए खोलने से पहले अब केवल दो महत्वपूर्ण मंजूरियां बाकी हैं। इनमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और वन संरक्षण कानून के तहत आवश्यक स्वीकृतियां शामिल हैं। इन दोनों मंजूरियों के मिलने के बाद स्कायवॉक के बीच स्थित कांच वाले हिस्से को पर्यटकों के लिए खोला जा सकेगा। हालांकि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित की है। हर छह महीने में स्कायवॉक को सुरक्षा जांच के लिए अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान कांच वाले हिस्से को स्टील ग्रेटिंग शीट से ढकने की योजना है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित तकनीकी जांच से संरचना की मजबूती, पर्यटकों की सुरक्षा और मौसम से होने वाले संभावित प्रभावों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

पर्यटकों की भीड़ संभालना चुनौती
स्कायवॉक की ऊंचाई और लंबाई इसे खास बनाती है। इसका ग्लास स्पैन एक किलोमीटर से अधिक बताया जा रहा है। संरचना को तेज हवाओं का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है और इसे सामान्य सुरक्षा मानकों से काफी अधिक हवा की गति सहने में सक्षम बनाया गया है। परियोजना के शुरू होने के बाद चिखलदरा में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने केवल स्कायवॉक को सुरक्षित रूप से संचालित करना ही नहीं, बल्कि बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करना भी चुनौती होगी। इसके लिए साइट पर भीड़ प्रबंधन और वाहनों की पार्किंग को लेकर व्यवस्था तैयार की जा रही है। अंतिम मंजूरियां मिलने के बाद स्कायवॉक के शुरू होने से चिखलदरा के पर्यटन को नई पहचान मिलने और विदर्भ में पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।