उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य! NEP 2020 और उल्लास योजना से मिली बड़ी सफलता

    09-Jul-2026
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- शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
- राज्यपाल ने दी आधिकारिक मंजूरी

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश का छठा पूर्ण साक्षर (फुली लिटरेट) राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा उल्लास (Understanding of Lifelong Learning for All in Society)–न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा निर्धारित सभी साक्षरता मानकों को पूरा करने के बाद उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने 8 जुलाई को राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम यह दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने वयस्क साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

मुख्यमंत्री - विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि यह सरकार, शिक्षा विभाग, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षरता का यह लक्ष्य उत्तराखंड को विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, आजीवन शिक्षा और जीवनोपयोगी कौशलों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य करेगी। वहीं, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की दिशा में राज्य की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आजीवन सीखने के अवसरों का विस्तार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उल्लास योजना बनी सफलता की आधारशिला
स्कूल शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि साक्षरता सामाजिक और आर्थिक विकास की सबसे मजबूत नींव है। उनके अनुसार, उल्लास कार्यक्रम ने समाज के विभिन्न वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वयस्कों को पढ़ने-लिखने के साथ-साथ नई क्षमताएं विकसित करने का अवसर दिया। स्कूल शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने इस सफलता का श्रेय जिला प्रशासन, विकासखंडों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों को दिया। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित सभी साक्षरता मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने कहा कि अब राज्य का अगला लक्ष्य डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करना तथा शिक्षार्थियों में व्यावहारिक जीवन कौशल विकसित करना होगा।

जनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत
राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा अभियान, जिला प्रशासन, स्वयंसेवी शिक्षक, साक्षरता प्रेरक, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया। विभिन्न जिलों में उल्लास कार्यक्रम के प्रभावी संचालन, नियमित निगरानी और व्यापक जनभागीदारी ने पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह कार्यक्रम केवल वयस्कों को पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता, जीवन कौशल और निरंतर सीखने की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है। राज्य के शिक्षा विभाग, एससीईआरटी, समग्र शिक्षा और न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम सेल ने भी इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए इसे उत्तराखंड के शिक्षा इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और देश में समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।