- डर के साये में नौकरी छोड़ी, कहा- 'गुंडों के बीच काम करना संभव नहीं'

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ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण स्थित केडीएमसी (कल्याण-डोंबिवली नगर निगम) संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टर के साथ कथित मारपीट का मामला अब और गंभीर हो गया है। घटना के बाद अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर ने इस्तीफा देकर ठाणे छोड़ दिया है। डॉक्टर का कहना है कि हमले के बाद वे खुद को बिल्कुल सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे और लगातार भय के माहौल में काम करना उनके लिए असंभव हो गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के आसपास आरोपी पक्ष के लोग लगातार नजर रख रहे थे, जिससे उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा। डॉक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अन्य डॉक्टर चाहें तो वहां काम जारी रख सकते हैं, लेकिन वह अब कभी उस अस्पताल में वापस नहीं जाएंगे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राज्यभर के डॉक्टरों में भारी आक्रोश है और चिकित्सा समुदाय ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
एनआईसीयू में बेड नहीं मिलने पर बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार शाम शास्त्री नगर अस्पताल में हुई। अस्पताल में भर्ती एक नवजात शिशु को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण डॉक्टरों ने परिजनों को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी। बताया जा रहा है कि इस निर्णय से नाराज परिजनों ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश सुक्र्या म्हात्रे से संपर्क किया। आरोप है कि इसके बाद पार्षद अपने कई समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों तथा अस्पताल कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। इस दौरान डॉक्टर वैभव सालुंखे को चोटें भी आईं। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा कर्मियों की शिकायत पर पुलिस ने पार्षद रमेश म्हात्रे समेत छह लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया।
पार्षद गिरफ्तार, आरोपों से किया इनकार
मामले में पुलिस ने बुधवार शाम आरोपी पार्षद रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि गिरफ्तारी के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने पर उन्हें उपचार के लिए ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। दूसरी ओर, रमेश म्हात्रे ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी चिकित्सक के साथ शारीरिक हिंसा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि डॉक्टर पहले माफी मांगेंगे, तभी वह भी खेद व्यक्त करेंगे। अपने बयान में उन्होंने कहा कि उन्हें शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया है। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है तथा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है।
डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन तेज
घटना के विरोध में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टरों और चिकित्सा संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि अस्पतालों में ही चिकित्सक सुरक्षित नहीं रहेंगे तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कानून लागू करने की मांग की है। इस्तीफा देकर ठाणे छोड़ने वाले डॉक्टर का फैसला इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है। चिकित्सा संगठनों का कहना है कि यदि डॉक्टर भय के कारण अपनी नौकरी छोड़ने को मजबूर होंगे तो इसका सीधा असर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा।