- हाफिज सईद के दामाद सहित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कई आतंकी सूची में शामिल

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को बड़ा कदम उठाया। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 23 पाकिस्तान आधारित आतंकियों और आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों को आधिकारिक तौर पर 'व्यक्तिगत आतंकी' घोषित किया है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद के करीबी सहयोगी और उसके दामाद हाफिज खालिद वलीद के अलावा जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इस नई अधिसूचना के बाद यूएपीए की चौथी अनुसूची में सूचीबद्ध व्यक्तिगत आतंकियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति पर दृढ़ता से काम कर रही है और देश की सुरक्षा के लिए हर आतंकी नेटवर्क को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आतंकी हमलों, घुसपैठ और ड्रोन से हथियार तस्करी के आरोप
गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल 23 व्यक्तियों में 17 पाकिस्तानी नागरिक और 6 भारतीय नागरिक हैं, जो वर्तमान में पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से आतंकवादी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर आतंकी हमले, सीमा पार घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद की तस्करी, आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता पहुंचाने, सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं का कट्टरपंथीकरण और भर्ती कराने जैसे गंभीर आरोप हैं। गृह मंत्रालय का कहना है कि इन व्यक्तियों को आधिकारिक रूप से आतंकी घोषित किए जाने से उनकी संपत्तियां जब्त करने, वित्तीय नेटवर्क पर रोक लगाने, गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
हाफिज सईद के करीबी और राम मंदिर की रेकी का आरोपी भी सूची में
नई सूची में अब्दुल रऊफ, राना इफ्तिखार, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्लाह खालिद और मौलाना यूसुफ तैबी जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें जमात-उद-दावा (जेयूडी) और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है। वहीं जैश-ए-मोहम्मद के मुफ्ती मोहम्मद असगर खान को वर्ष 2016 के नगरोटा सेना शिविर हमले का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। इसके अलावा हाफिज अब्दुल शकूर और अब्दुल्ला जेहादी पर भी उसी हमले से जुड़े घुसपैठ अभियान में भूमिका निभाने का आरोप है। गृह मंत्रालय ने मोहम्मद मुसद्दिक को ड्रोन के माध्यम से भारत में हथियार भेजने के साथ-साथ अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर, नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आईओसीएल रिफाइनरी जैसे संवेदनशील स्थलों की रेकी करने का आरोपी बताया है।
2019 संशोधन से मिली कार्रवाई की शक्ति
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में बेंगलुरु का रहने वाला मोहम्मद शहीद फैसल भी शामिल है, जो वर्तमान में पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहकर कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े मॉड्यूल के लिए काम कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार वह ऑनलाइन कट्टरपंथ फैलाने, पाकिस्तान में हथियारों का प्रशिक्षण दिलाने, आतंक के लिए धन जुटाने तथा एन्क्रिप्टेड संचार और फर्जी पहचान के उपयोग का प्रशिक्षण देने में शामिल रहा है। उल्लेखनीय है कि यूएपीए में वर्ष 2019 में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को केवल संगठनों ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित करने का अधिकार मिला है। गृह मंत्रालय का कहना है कि इस कार्रवाई से आतंकवादी संगठनों के वित्तीय, लॉजिस्टिक और भर्ती नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ कानूनी और जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अधिक प्रभावी होगी।