'2027 में फिर पेपर लीक नहीं होगा, इसकी गारंटी कौन देगा?'—अहिल्यानगर की छात्राओं ने उठाए सवाल

    24-Jul-2026
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अहिल्यानगर। देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर जारी विरोध अब महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में भी तेज हो गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन की गूंज अब राज्य के शहरों तक पहुंच चुकी है। विभिन्न छात्र संगठनों, अभिभावकों और सामाजिक संस्थाओं ने सड़कों पर उतरकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके से फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान दीपके अपने रुख पर कायम रहे और कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और परीक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं किए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन को लेकर राज्य के कई हिस्सों में छात्रों के भविष्य, आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव को लेकर चिंता भी सामने आई।

अहिल्यानगर में छलका छात्रों का दर्द

अहिल्यानगर में दूसरी बार नीट परीक्षा देने वाली छात्रा हर्षाली यादव ने आंदोलन के दौरान अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि उनके पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं और बड़ी मुश्किल से कोचिंग की फीस जुटाई थी। पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षा देनी पड़ी, लेकिन इस बार अपेक्षित अंक नहीं मिले। इस सदमे के बाद उनके पिता को हार्ट अटैक आया। अब परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे फिर से महंगी कोचिंग कर सकें। वहीं छात्रा निर्मिति साल्वे ने बताया कि पहली परीक्षा में 500 से अधिक अंक आए थे, लेकिन दोबारा परीक्षा में केवल 200 अंक मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 2027 में फिर परीक्षा दें तो कौन गारंटी देगा कि दोबारा पेपर लीक नहीं होगा। उनकी मां भारती साल्वे ने बताया कि बेटी की पढ़ाई के लिए बैंक से कर्ज लिया गया है और बार-बार परीक्षा देने की मजबूरी परिवारों पर मानसिक और आर्थिक दोनों तरह का बोझ डाल रही है। शिक्षकों ने भी मांग की कि नीट परीक्षा राज्यों के स्तर पर आयोजित की जाए ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।

संभाजीनगर में वकीलों का समर्थन
दिल्ली में छात्रों के समर्थन में चल रहे आंदोलन का असर छत्रपति संभाजीनगर में भी दिखाई दिया। स्थानीय बार एसोसिएशन और वकीलों के संगठनों ने आंदोलन के समर्थन में क्रांति चौक पर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के समर्थन में भी आवाज़ें बुलंद हुईं। कुछ समय तक क्रांति चौक क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन चलता रहा, जबकि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस ने पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता और पारदर्शिता दिखानी चाहिए।

रत्नागिरी के दापोली में निकला विरोध मार्च
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध की गूंज रत्नागिरी जिले के दापोली में भी सुनाई दी। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) ने आक्रामक विरोध मार्च निकालते हुए लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अनुसूचित जाति उप-वर्गीकरण के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। बाद में प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उप-वर्गीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो पूरे महाराष्ट्र में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। कुल मिलाकर, नीट पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सरकार की जवाबदेही का बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।