- परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत
- पेपर लीक पर सख्ती, एनटीए में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

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नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 47 अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। बताया जा रहा है कि यह कदम एनटीए के व्यापक पुनर्गठन (ओवरहॉल) का हिस्सा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से एजेंसी पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर लगातार विवादों में रही है। इसी वर्ष मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द करनी पड़ी थी और जून में दोबारा परीक्षा कराई गई। इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली सहित देशभर में छात्रों का आंदोलन जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और नए शिक्षा सचिवों के साथ सुधारों की नई शुरुआत
सरकार ने केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि परीक्षा संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए भी बड़े फैसले लिए हैं। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किया गया है। इन सभी मामलों को अब इसी विशेष अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने तिस हजारी कोर्ट की मध्यस्थता केंद्र की प्रभारी न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा को विशेष न्यायाधीश के रूप में राउज एवेन्यू कोर्ट में नियुक्त किया है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय में भी प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव और टी.के. अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि विनीत जोशी का तबादला पंचायती राज विभाग में सचिव के पद पर किया गया है। इन बदलावों को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कानून में संशोधन की तैयारी
नीट पेपर लीक को लेकर जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित संशोधन विधेयक को सोमवार को संसद में विचार और पारित करने के लिए पेश किए जाने की संभावना है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा था कि युवाओं का भविष्य और उनका कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को त्वरित और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से दो घंटे की बैठक
इधर, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का दौर भी जारी है। शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सीजेपी प्रतिनिधियों से करीब दो घंटे तक बैठक की। बैठक के बाद जे.पी. नड्डा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा सुधार से जुड़े पांच सुझाव सरकार के सामने रखे हैं। सरकार ने इन मांगों पर विस्तार से विचार करने के लिए एक दिन का समय मांगा है और शनिवार दोपहर दोबारा बैठक कर अपना पक्ष रखने का आश्वासन दिया है। यह सरकार और सीजेपी के बीच दूसरी औपचारिक बैठक थी। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर चुके हैं, लेकिन छात्रों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।