ट्रायल रूम में नाबालिग का चोरी-छिपे वीडियो बनाने वाले युवक को 3 साल की सजा

    23-Jul-2026
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- कोर्ट ने कहा- निजता का गंभीर उल्लंघन
- ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी

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नागपुर। सीताबर्डी स्थित एक रेडीमेड कपड़ों के शोरूम के ट्रायल रूम में नाबालिग लड़की का चोरी-छिपे मोबाइल से वीडियो बनाने के मामले में नागपुर की अदालत ने आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी. जे. मोडक ने सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए आरोपी निखिल उर्फ पिंटू दीपक चौथमल (27), निवासी पाचपावली, को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी पर 4,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 354ए, पॉक्सो अधिनियम की धारा 12 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ई के तहत दोषी ठहराया गया।

स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने पहुंची थी पीड़िता
मामला 10 अगस्त 2019 का है। 17 वर्षीय पीड़िता अपनी एक मित्र के साथ सीताबर्डी मार्केट स्थित एक गारमेंट्स शोरूम में स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने गई थी। ट्रायल रूम में कपड़े बदलते समय आरोपी ने कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर सीताबर्डी पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तत्कालीन सहायक पुलिस निरीक्षक शुभदा सांखे ने मामले की जांच की। जांच के दौरान जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाणों को अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जिससे आरोप सिद्ध करने में मदद मिली।

'ट्रायल रूम जैसी निजी जगह पर रिकॉर्डिंग गंभीर अपराध'
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का अपराध साबित किया। राज्य की ओर से लोक अभियोजक आसावरी पारसोडकर ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वाई. बी. मांडपे उपस्थित रहे। कोर्ट समन्वय अधिकारी किरण कैथल और मीनल लोनारे ने भी सुनवाई के दौरान सहयोग किया। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि ट्रायल रूम या अन्य निजी स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की चोरी-छिपे वीडियो रिकॉर्डिंग करना उनकी निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के अपराधों में कड़ी सजा आवश्यक है, ताकि समाज में ऐसा करने वालों के मन में कानून का भय बना रहे और लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हो।