- 'धर्मेंद्र प्रधान को देना चाहिए इस्तीफा'
- छात्रों की मांग का किया समर्थन

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नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि अहिंसा और बातचीत से निकल सकता है। हजारे ने छात्रों की उस मांग का भी समर्थन किया, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं तो सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। अन्ना हजारे ने कहा कि युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जनता मालिक होती है और मंत्री जनता के सेवक, इसलिए जनभावनाओं का सम्मान लोकतंत्र की मूल भावना है।
'लाठीचार्ज गलत, अहिंसा ही लोकतंत्र की ताकत'
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर भी अन्ना हजारे ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करना गलत है और इससे हालात और बिगड़ते हैं। हजारे ने अपने आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में 22 बार अनशन किए, लेकिन कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। उनका मानना है कि लोकतंत्र में असहमति का जवाब बल प्रयोग नहीं, बल्कि संवाद होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह कहने से परहेज किया कि सरकार शक्ति का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन यह जरूर कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिंसा केवल आंदोलन की रणनीति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, छात्रों और वांगचुक को लेकर जताई चिंता
अन्ना हजारे ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भी अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने पत्र में दिल्ली में छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थकों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को बेहद दुखद बताया। हजारे ने कहा कि पेपर लीक, भर्तियों में देरी और बढ़ती बेरोजगारी के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है, जिसे केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय सामाजिक चिंता के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के बजाय छात्रों और अभिभावकों से संवाद स्थापित किया जाए। उनका मानना है कि यदि सरकार जवाबदेही तय करते हुए संबंधित मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करती है तो इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का सकारात्मक संदेश जाएगा।
वांगचुक की मांग और कानूनी कार्रवाई पर भी उठे सवाल
सोनम वांगचुक ने भी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने से पहले केंद्र सरकार से यह आश्वासन मांगा है कि 'संसद चलो' आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक या दंडात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से संबंधित याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। ऐसे में NEET विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित न रहकर राजनीतिक, प्रशासनिक और न्यायिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है।