- 25वें दिन भी जारी अनशन
- सरकार से लिखित आश्वासन की मांग

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नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को समाप्त करने के लिए नई शर्त रखी है। अनशन के 25वें दिन बुधवार को उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट और बिना किसी शर्त के यह आश्वासन देने की मांग की कि 'संसद चलो' आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन में शामिल युवाओं का एकमात्र उद्देश्य निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना था, इसलिए उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसा आश्वासन देती है तो वह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास रखते हुए अपना अनशन समाप्त कर देंगे, अन्यथा उनका अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।
संसद में चर्चा का मिला भरोसा
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी बयान में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्री अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे थे और सरकार की ओर से कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए। इनमें नीट-यूजी पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने तथा संसद में इस पूरे मामले पर सार्थक चर्चा कराने का भरोसा शामिल है। वांगचुक के अनुसार, चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर भी विचार किए जाने की बात कही गई। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 65 सांसद उनसे मिल चुके हैं और अनशन समाप्त करने का आग्रह कर चुके हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और उनके खिलाफ कार्रवाई न होने का आश्वासन सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।
'संसद चलो' मार्च को बताया शांतिपूर्ण
वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के खिलाफ भविष्य में कोई मुकदमा, उत्पीड़न या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी। उनका कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग से बचा जाए और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए।
दिल्ली पुलिस की 10 एफआईआर
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की हैं। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं, मेदांता अस्पताल ने स्वास्थ्य बुलेटिन जारी कर बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में चल रहा है। अस्पताल के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, वे पूरी तरह सजग हैं और उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत सामान्य सीमा के भीतर हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि उन्हें उनकी सूचित सहमति के अनुसार ही उपचार दिया जा रहा है।