शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान पूरी तरह विफल', राहुल गांधी ने छात्रों की मांग का किया समर्थन

    22-Jul-2026
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'इस्तीफा पूरी तरह जायज', शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा

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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे शिक्षा मंत्री के रूप में पूरी तरह विफल रहे हैं और उन्हें अपने पद से हटा दिया जाना चाहिए। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र जिस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, कांग्रेस उसका पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे परीक्षा पत्र लीक ने भारत की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरा नुकसान पहुंचाया है। राहुल ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान न केवल शिक्षा व्यवस्था को संभालने में असफल रहे हैं, बल्कि उनकी कार्यशैली ने देश की सबसे बड़ी पूंजी—युवा शक्ति और शिक्षा प्रणाली—को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की पहली और सबसे वैध मांग यही है कि शिक्षा मंत्री को उनके पद से मुक्त किया जाए, क्योंकि वे इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने में असमर्थ साबित हुए हैं।

'छात्रों पर कार्रवाई करने वालों की तय हो जवाबदेही'
राहुल गांधी ने 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले ही नहीं, बल्कि ऐसा आदेश देने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों ने कोई अपराध नहीं किया, वे केवल निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी इस पूरे घटनाक्रम पर छात्रों से माफी मांगने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं। राहुल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के माध्यम से लगातार युवाओं की समस्याएं सुन रही है और यह स्पष्ट है कि देश का युवा शिक्षा और रोजगार दोनों मोर्चों पर निराशा का सामना कर रहा है।

'शिक्षा के बाद भी रोजगार के रास्ते बंद'

राहुल गांधी ने कहा कि आज का युवा शिक्षा पूरी करने के बाद भी भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र कमजोर पड़ चुका है, उद्यमिता के लिए पर्याप्त अवसर नहीं हैं और बैंकिंग व्यवस्था से छोटे उद्यमियों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। उनका आरोप था कि अधिकांश वित्तीय सहायता कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित हो गई है, जिससे नए उद्यमियों के लिए रास्ते बंद हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी बदलाव रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में लगातार निजीकरण बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं के पास सरकारी नौकरी ही प्रमुख विकल्प बचता है और जब उसी भर्ती प्रक्रिया में पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं तो उनका भविष्य संकट में पड़ जाता है।

'10 वर्षों में 152 पेपर लीक, लेकिन एक भी दोषी नहीं'
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 परीक्षा पत्र लीक हुए हैं, जिससे लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हर महीने औसतन एक पेपर लीक होने से लाखों छात्रों की मेहनत और मानसिक तनाव व्यर्थ हो जाता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में पेपर लीक होने के बावजूद अब तक किसी भी मामले में प्रभावी सजा या दोषसिद्धि नहीं हुई है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक बताते हुए कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। राहुल ने कहा कि कई छात्र इस दबाव के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं, लेकिन सरकार इस गंभीर संकट को पर्याप्त संवेदनशीलता से नहीं देख रही।

'नीट की तैयारी पर परिवार जितना खर्च करते हैं, उतना ही शिक्षा बजट'
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को महंगा बताते हुए कहा कि केवल नीट-यूजी परीक्षा की तैयारी पर देशभर के परिवार लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जबकि केंद्र सरकार का वार्षिक शिक्षा बजट लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी जीवनभर की बचत बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। राहुल ने इसे परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि युवाओं का आंदोलन केवल परीक्षा नहीं, बल्कि निष्पक्ष शिक्षा, पारदर्शिता और बेहतर भविष्य की मांग का आंदोलन है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस छात्रों की सभी लोकतांत्रिक और वैध मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है तथा सरकार को शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।