- पीओके में 24वें दिन भी जारी सरकार विरोधी आंदोलन!

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रावलकोट (पीओके): पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार 24वें दिन भी जारी रहा। रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और सेना पर गंभीर आरोप लगाए। अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमन खान ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने वर्षों तक कश्मीरियों के हाथों में हथियार थमाए और अब उसी जनता को आतंकवादी घोषित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सरकार और उसकी संस्थाएं आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देती रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 9 जून से शुरू हुए इस आंदोलन से जुड़े करीब 150 लोगों और अवामी एक्शन कमेटी को पीओके सरकार ने आतंकवादी घोषित कर दिया है। इस फैसले का विरोध करते हुए आंदोलनकारियों ने इसे जनता की आवाज दबाने की कोशिश बताया और कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे।
'हमें आतंकवादी कहा जा रहा है, जबकि हथियार सेना ने दिए'
सभा को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की मौजूदगी में कहा कि पाकिस्तानी सेना ने ही कश्मीरियों को हथियार दिए थे और अब वही लोग उन्हें आतंकवादी करार दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे हमें आतंकवादी कहते हैं, लेकिन सच यह है कि पाकिस्तान की सेना ने खुद कश्मीरियों के हाथों में बंदूकें दीं। आज जब हम अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं तो हमें अपराधी बताया जा रहा है।" अमन खान ने कहा कि आंदोलन में शामिल लोग किसी भी तरह की हिंसा के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि वे अपने राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उनका आरोप था कि पाकिस्तान सरकार विरोध की हर आवाज को दबाने के लिए आतंकवाद का ठप्पा लगाने की नीति अपना रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
जैश-ए-मोहम्मद की रैली का किया जिक्र
सरदार अमन खान ने अपने संबोधन में पिछले वर्ष 5 फरवरी को रावलकोट में आयोजित जैश-ए-मोहम्मद की एक रैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस रैली में हथियारबंद लोग खुलेआम तलवारें और एके-47 राइफलें लेकर शहर में घूमे थे तथा भारत के खिलाफ धमकियां दे रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने रावलकोट के डिप्टी कमिश्नर को चुनौती देते हुए कहा कि उस समय सरकारी संरक्षण में हथियारों के साथ रैलियां आयोजित होती थीं, लेकिन आज अपने अधिकारों की मांग करने वालों को आतंकवादी कहा जा रहा है। अमन खान ने कहा कि प्रदर्शनकारी इस भूमि के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं और उन्हें डराकर उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती। उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान का अभिन्न हिस्सा मानने की सोच को वहां की जनता स्वीकार नहीं करती।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और व्यापक
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज होगा। उनका कहना था कि रावलकोट में पीओके के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 80 हजार लोग एकत्र हुए हैं और यदि यह जनसमूह मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करता है तो आंदोलन केवल 38 मांगों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि तब यह आंदोलन पाकिस्तान से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर खाली करने की मांग में बदल सकता है। उन्होंने सरकार से संवाद शुरू करने और जनता की मांगों को स्वीकार करने की अपील की। लगातार कई दिनों से जारी इस आंदोलन ने पीओके में राजनीतिक असंतोष को नई दिशा दी है और पाकिस्तान सरकार के सामने स्थिति को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।