केतन अग्रवाल मौत मामला: सिया गोयल के पॉलीग्राफ टेस्ट को अदालत की मंजूरी

    02-Jul-2026
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- पुणे पुलिस ने जांच में नए सुराग मिलने की जताई उम्मीद
- परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिकी है पूरी जांच

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पुणे: पुणे के व्यवसायी एवं डेवलपर केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में जांच कर रही पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अदालत ने इस मामले की आरोपी सिया गोयल के पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट की अनुमति दे दी है। पुलिस का मानना है कि इस परीक्षण से आरोपी के बयानों की सत्यता की जांच करने और मामले में नए सुराग हासिल करने में मदद मिल सकती है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला फिलहाल मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर आधारित है और अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि 19 जून को लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल को खाई में किसने धक्का दिया। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर अग्रवाल को खाई में धक्का दिया था, हालांकि इस आरोप को साबित करने के लिए अभी ठोस प्रमाण जुटाए जाने बाकी हैं।

प्रत्यक्ष गवाह नहीं, डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

पुलिस ने अदालत को बताया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं है और जिस स्थान पर केतन अग्रवाल खाई में गिरे, वहां तक किसी सीसीटीवी कैमरे की पहुंच नहीं थी। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने घटना से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन से कॉल रिकॉर्ड, अन्य डिजिटल फाइलें और यहां तक कि रिसायकल बिन का डेटा भी डिलीट कर दिया, जिससे घटनाक्रम को दोबारा जोड़ने में कठिनाई हो रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों और उनके परिजनों द्वारा शादी की तैयारियों को लेकर दिए गए बयानों में भी कई विरोधाभास सामने आए हैं। इन विरोधाभासी बयानों के कारण घटना के पीछे के संभावित उद्देश्य (मोटिव) को स्पष्ट रूप से स्थापित करना जांच एजेंसी के लिए चुनौती बना हुआ है।

पॉलीग्राफ टेस्ट से मिल सकते हैं नए सुराग

जांच अधिकारियों का कहना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट का उद्देश्य आरोपी के बयानों की पुष्टि करना और उनमें मौजूद विरोधाभासों की पहचान करना है। हालांकि भारतीय कानून के अनुसार पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट अदालत में प्रत्यक्ष साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होती, लेकिन यदि इस परीक्षण के दौरान ऐसी कोई जानकारी सामने आती है, जिसके आधार पर स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य प्राप्त होते हैं, तो उनका उपयोग जांच में किया जा सकता है। पुलिस का कहना है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित इस मामले में सबूतों की श्रृंखला को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष मेघालय के चर्चित सोनम रघुवंशी हनीमून मर्डर केस का भी उल्लेख किया और कहा कि उस मामले में जांच संबंधी प्रक्रियागत कमियों से अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ा था। इसलिए इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करते हुए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

आरोपी की सहमति के बिना नहीं होगा टेस्ट
भारतीय कानून के तहत किसी भी आरोपी का पॉलीग्राफ टेस्ट उसकी स्वैच्छिक सहमति के बिना नहीं कराया जा सकता। अदालत की अनुमति मिलने के बाद भी सिया गोयल को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी सहमति देनी होगी। इसके साथ ही उसे कानूनी सलाह लेने का पूरा अधिकार भी मिलेगा। यदि वह परीक्षण के लिए सहमत नहीं होती, तो पुलिस उसे इसके लिए बाध्य नहीं कर सकती। वहीं, यदि परीक्षण कराया जाता है, तो उसकी रिपोर्ट को न तो स्वीकारोक्ति माना जाएगा और न ही दोष सिद्ध करने वाला प्रत्यक्ष प्रमाण। हालांकि परीक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी के आधार पर यदि जांच एजेंसी को कोई नया स्वतंत्र साक्ष्य मिलता है, तो उसे जांच में शामिल किया जा सकता है। पुणे पुलिस ने अदालत को बताया है कि मामले की जांच अभी जारी है और केतन अग्रवाल की मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए हर संभव साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।