- शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
मुंबई: राज्य में निजी और सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों को स्कूल या तय दुकानों से ही किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किए जाने का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में शिकायतें प्राप्त होती हैं तो स्कूल शिक्षा विभाग संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। मंत्री ने बताया कि कुछ स्कूलों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। राज्य में 15 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि कई निजी और स्व-वित्तपोषित स्कूल अपनी पसंद की दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
महंगी किताबों से अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझविधानसभा में चर्चा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि कई निजी और सीबीएसई स्कूल बाजार की तुलना में कहीं अधिक कीमत पर पाठ्यपुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सामग्री बेच रहे हैं। सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्कूलों और चुनिंदा विक्रेताओं के बीच गठजोड़ के कारण अभिभावकों को मजबूरी में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि सरकार इस तरह की किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने दोहराया कि अभिभावकों को अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी अधिकृत विक्रेता से किताबें खरीदने का अधिकार है। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करते हुए विद्यार्थियों पर दबाव बनाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे ऐसे मामलों की शिकायत स्कूल शिक्षा विभाग से करें, ताकि दोषी संस्थानों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
निगरानी के लिए बनेगी विशेष समितिसदन में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच तीखी चर्चा और हंगामे के बाद स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री पंकज भोयर ने घोषणा की कि ऐसे स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति निजी और सीबीएसई स्कूलों में किताबों और शैक्षणिक सामग्री की बिक्री से संबंधित शिकायतों की जांच करेगी तथा आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करेगी। हालांकि समिति के गठन की समय-सीमा और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि समिति का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत दिलाना और स्कूलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना होगा। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि समिति कितनी जल्दी गठित होती है और वह नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है।
बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर भी सरकार की सख्तीविधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने बोर्ड परीक्षाओं में नकल और अन्य अनियमितताओं पर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में आयोजित 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के दौरान सामूहिक नकल और अन्य गड़बड़ियों के मामलों में 100 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। मंत्री के अनुसार, सबसे अधिक 650 मामले अमरावती क्षेत्र से सामने आए, जबकि छत्रपति संभाजीनगर मंडल में 501 मामले दर्ज किए गए। 12वीं की परीक्षा के दौरान विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सामूहिक नकल के 15 मामले दर्ज हुए, जिनमें आठ अमरावती, तीन नागपुर, तीन छत्रपति संभाजीनगर और एक लातूर मंडल से संबंधित था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल के कुल 1,469 मामलों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।