- संवाद से निकले समाधान
- आंदोलन को लंबा खींचना उचित नहीं : अन्ना हजारे

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की 20 दिनों से अधिक समय से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को लेकर केंद्र सरकार से जल्द बातचीत शुरू करने की अपील की है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में हजारे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लंबे समय तक चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन की अनदेखी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन को लंबा खींचने या उसे नजरअंदाज करने की नीति नहीं अपनानी चाहिए, बल्कि संवाद के जरिए जल्द समाधान निकालना चाहिए। अन्ना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को किसी भी दुखद परिणाम का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि बातचीत करने में कोई हानि नहीं है। उनका मानना है कि यदि समय रहते संवाद शुरू किया जाए तो स्थिति को सहज और शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जा सकता है।
बल प्रयोग से बचने की सलाह
अन्ना हजारे ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि समाज से जुड़ा विषय है, इसलिए इसे पूरी संवेदनशीलता और शांति के साथ संभाला जाना चाहिए। हजारे ने कहा कि यदि किसी आंदोलनकारी के साथ जबरदस्ती, खींचतान या बल प्रयोग किया जाता है तो विवाद और अधिक जटिल हो जाता है। उनके अनुसार, प्रशासन को ऐसे मामलों में संयम और संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान बातचीत से ही संभव है, न कि टकराव से। उनके इस बयान को सोनम वांगचुक के समर्थन में आई एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल ले गई पुलिस
सोनम वांगचुक को उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद शनिवार सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, चिकित्सकों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया। पुलिस का कहना है कि लगातार उपवास और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण वांगचुक की शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी, इसलिए उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक था। वांगचुक की अस्पताल में भर्ती के बाद उनके आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।
बातचीत की मांग तेज
वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद सफदरजंग अस्पताल और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है तथा कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए हैं। प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सतर्क है, वहीं आंदोलन से जुड़े लोग लगातार सरकार से वार्ता शुरू करने की मांग कर रहे हैं। अन्ना हजारे की अपील के बाद यह मांग और तेज हो गई है कि सरकार राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर वांगचुक से बातचीत करे। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस अपील पर क्या रुख अपनाती है और क्या लंबे समय से जारी इस आंदोलन का समाधान संवाद के जरिए निकल पाता है।