NEET-CBSE विवाद पर सरकार से जवाब की मांग

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नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था और NEET-CBSE विवाद को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों की मांग उठा रहे सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को उनके समर्थन में एक दिवसीय "मास हंगर स्ट्राइक" आयोजित करने की घोषणा की है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 26 दिनों से जारी प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। वहीं, सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति ने इस आंदोलन को और गंभीर बना दिया है।
ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, अनशन शुरू होने के बाद से सोनम वांगचुक का वजन 8.9 किलोग्राम तक कम हो चुका है। डॉक्टरों ने उन्हें "बेहद कमजोर" बताया है। बुलेटिन के मुताबिक उनका रक्तचाप 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 97 प्रतिशत दर्ज किया गया है। हालांकि चिकित्सकों ने यह भी कहा है कि उनके शरीर में फिलहाल पानी की मात्रा संतोषजनक बनी हुई है, लेकिन लगातार उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने केंद्र सरकार पर आंदोलन की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सोनम वांगचुक छात्रों के लिए न्याय की मांग करते हुए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक केवल चुप्पी देखने को मिली है। डिपके ने कहा कि यह केवल जवाबदेही का सवाल नहीं, बल्कि संवेदनशीलता का भी विषय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाने के बजाय आंदोलन के मूल मुद्दों पर ध्यान दिया जाए। उनके अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक संवाद की पहल क्यों नहीं की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।
वहीं, जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन में शामिल छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए बिना शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल नहीं किया जा सकता। आंदोलनकारियों का मानना है कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या सरकार आंदोलनकारियों से संवाद का रास्ता अपनाएगी या विरोध प्रदर्शन आगे और तेज होगा।