- महाकुंभ में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़ का कथित तौर पर उठाया गया फायदा, आठ आरोपी गिरफ्तार

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि सबसे अधिक रकम की कथित चोरी महाकुंभ के दौरान हुई, जब मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी और दान की राशि में भी कई गुना वृद्धि हुई थी। पुलिस के अनुसार, इसी अवधि में आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से इस अवसर का फायदा उठाया। मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि सभी आरोपी एक संगठित समूह के रूप में काम कर रहे थे और दान राशि की चोरी के लिए पहले से पूरी योजना बनाई गई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी महाकुंभ से पहले भी छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं में कथित रूप से शामिल रहे थे, लेकिन महाकुंभ के दौरान मंदिर में बढ़ी दान राशि ने उन्हें बड़े स्तर पर वारदात को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की पूरी साजिश कैसे रची गई और इसे किस तरह अंजाम दिया गया।
संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच
जांच के दौरान पुलिस ने लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा, जो आपस में साले बताए जा रहे हैं, को कथित तौर पर इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता माना है। जांच एजेंसियों का दावा है कि चोरी की गई राशि का बड़ा हिस्सा इन्हीं दोनों के पास पहुंचा। पुलिस ने दोनों आरोपियों से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक संपत्तियों की जानकारी जुटाई है और उनकी खरीद-फरोख्त, निवेश तथा अन्य वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा रही है। इसके साथ ही आयकर विभाग से भी सहयोग मांगा गया है, ताकि आरोपियों के बैंक खातों, आय के स्रोतों और संपत्तियों का सत्यापन किया जा सके। पुलिस का उद्देश्य कथित चोरी की गई रकम के पूरे वित्तीय प्रवाह का पता लगाना है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि धन कहां-कहां और किस रूप में इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियां इस मामले को केवल चोरी तक सीमित न मानकर संभावित वित्तीय अनियमितताओं के पहलू से भी देख रही हैं।
SBI कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या पुलिस अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिखकर जांच में सहयोग मांगने की तैयारी कर रही है। यदि ED इस मामले में शामिल होती है तो कथित धन शोधन और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पहलुओं की भी गहराई से जांच की जा सकती है। वहीं, जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि कहीं बैंक के किसी कर्मचारी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों की मदद तो नहीं की। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और न ही किसी बैंक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले से जुड़े हर वित्तीय पहलू की गहन जांच की जा रही है, ताकि दान राशि की कथित चोरी से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।