टोल वसूलने के बावजूद सुरक्षित सड़क नहीं देना सेवा में गंभीर कमी: एनसीडीआरसी

    27-Jun-2026
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नागपुर : राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) को नागपुर निवासी श्रीकांत दिवाकर सिरपुरकर को 94,170 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि टोल वसूलने के बावजूद सड़क को सुरक्षित स्थिति में न रखना सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) है। यह फैसला उन लाखों वाहन चालकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो टोल टैक्स चुकाने के बावजूद खराब सड़कों और गड्ढों से होने वाले नुकसान का सामना करते हैं।

गड्ढे से टकराने पर क्षतिग्रस्त हुई थी कार

मामला 2 अक्टूबर 2020 का है, जब श्रीकांत सिरपुरकर अपनी टाटा नेक्सॉन कार से नागपुर से छिंदवाड़ा जा रहे थे। छिंदवाड़ा टोल प्लाजा के पास उनकी कार तेज रफ्तार में सड़क पर बने गहरे गड्ढे से टकरा गई, जिससे टायर फट गया और वाहन को गंभीर नुकसान पहुंचा। शिकायत दर्ज कराने के लिए जब उन्होंने टोल प्लाजा पर शिकायत रजिस्टर मांगा तो कर्मचारियों ने उसके उपलब्ध न होने की बात कही। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान NHAI की ओर से स्वीकार किया गया कि कुछ स्थानों पर सड़क मरम्मत का कार्य लंबित था, हालांकि उसने सड़क सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी से इनकार किया।

84 दिनों में मुआवजा देने का आदेश
आयोग ने NHAI की दलील को खारिज करते हुए कहा कि टोल वसूलने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह सड़क को सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाए रखे। यदि सड़क पर गड्ढों के कारण वाहन क्षतिग्रस्त होता है तो यह सेवा में गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। आयोग ने श्रीकांत सिरपुरकर को वाहन मरम्मत के लिए 80,000 रुपये, टोल शुल्क के 170 रुपये, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 4,000 रुपये, कुल 94,170 रुपये का मुआवजा 84 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस फैसले को उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम और नजीर स्थापित करने वाला निर्णय माना जा रहा है।