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नागपुर: अंबाझरी झील से जलकुंभी हटाने के लिए नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) द्वारा बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन महापौर द्वारा निर्धारित तीन सप्ताह की समयसीमा बीत जाने के बावजूद सफाई कार्य पूरा नहीं हो सका है। एनएमसी ने इस अभियान में टिपर, पोकलेन मशीनें तथा दिल्ली से मंगाई गई विशेष वीड हार्वेस्टिंग मशीन सहित भारी मशीनरी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लगाया है। निगम का दावा है कि प्रतिदिन करीब 200 टन जलकुंभी हटाई जा रही है, लेकिन स्थानीय नागरिकों और मॉर्निंग वॉकर्स का कहना है कि जमीनी स्तर पर काम की गति अभी भी अपेक्षा से काफी धीमी है। देरी के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और कई करदाताओं ने अभियान की कार्यप्रणाली तथा सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाए हैं।
70-80 प्रतिशत सफाई पूरी, लेकिन गहरे हिस्से बने चुनौती
प्रभाग 13 (ए) के नगरसेवक योगेश पाचपोर ने बताया कि अब तक झील के लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्से से जलकुंभी हटाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि गैबियन ब्रिज के पास जलकुंभी का नया प्रवाह रोक दिया गया है तथा अगस्त में वाडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू होने के बाद इस समस्या में काफी कमी आने की उम्मीद है। उनके अनुसार शेष जलकुंभी झील के गहरे हिस्सों में फैली हुई है, जहां केवल हाल ही में खरीदी गई एक विशेष हार्वेस्टिंग मशीन ही काम कर सकती है। इसी कारण सफाई कार्य की गति प्रभावित हो रही है। एनएमसी अब वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) से एक और ऐसी मशीन लेने की योजना बना रही है, जिससे अभियान में तेजी आने की उम्मीद है।
मानसून में फिर फैल सकती है जलकुंभी
'द हितवादा' की टीम द्वारा गुरुवार को किए गए निरीक्षण में झील के गहरे हिस्से में एक वीड हार्वेस्टिंग मशीन और दो पोकलेन मशीनें काम करती दिखाई दीं। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि इस वर्ष झील का जलस्तर काफी कम है और बड़ी मात्रा में जलकुंभी बांध के पास जमा हो गई है। अब मानसून शुरू होने के साथ यह आशंका बढ़ गई है कि यदि शेष 20 से 30 प्रतिशत जलकुंभी को जल्द नहीं हटाया गया तो बारिश का बहाव इसे फिर पूरे जलाशय में फैला सकता है, जिससे अब तक किए गए करोड़ों रुपये के खर्च और महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। हालांकि एनएमसी ने प्री-मानसून तैयारियों के तहत गड्ढों की मरम्मत और नालों की सफाई का दावा किया है, लेकिन हल्की बारिश के बाद ही शहर में जलभराव और पुराने पेड़ों के गिरने जैसी घटनाएं सामने आने लगी हैं, जिससे नागरिकों की चिंता और बढ़ गई है।