
Image Source:(Internet)
श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश): राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई (DRI, Nagpur Regional Unit) ने मुंबई जोनल यूनिट के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में सक्रिय एक अवैध वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। 24 और 25 जून 2026 को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान अधिकारियों ने मलाबार जायंट स्क्विरल (विशाल भारतीय गिलहरी), इंडियन स्टार कछुआ, जंगल फाउल तथा स्मॉल इंडियन सिवेट जैसे संरक्षित वन्यजीवों की तस्करी का खुलासा किया। डीआरआई टीम ने श्रीकाकुलम शहर में एक संदिग्ध को पकड़कर उसके कब्जे से पिंजरों में कैद चार मलाबार जायंट स्क्विरल, एक इंडियन स्टार कछुआ और 14 जंगल फाउल को सुरक्षित मुक्त कराया। इसके बाद की जांच में अधिकारियों को रायाकुर्दी गांव स्थित एक दूरस्थ इलाके तक पहुंचना पड़ा, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, बिजली और मोबाइल नेटवर्क के अभाव के बावजूद देर रात तक अभियान जारी रखते हुए दो स्मॉल इंडियन सिवेट के शावकों को भी बचाया गया।
अनुसूची-1 में शामिल हैं बरामद वन्यजीव
डीआरआई के अनुसार मलाबार जायंट स्क्विरल, स्मॉल इंडियन सिवेट और इंडियन स्टार कछुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 (Schedule-I) में शामिल हैं। इस श्रेणी में आने वाले वन्यजीवों को सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है तथा इनके शिकार, कब्जे, परिवहन और व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध है। कार्रवाई के दौरान बरामद सभी वन्यजीवों को अधिनियम के प्रावधानों के तहत जब्त किया गया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद गिरफ्तार आरोपी और सभी रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को आगे की कार्रवाई के लिए श्रीकाकुलम वन विभाग को सौंप दिया गया है। वन विभाग अब संबंधित प्रावधानों के तहत मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई करेगा।
जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा, जनता से सहयोग की अपील
डीआरआई ने बताया कि इन दुर्लभ वन्यजीवों की विदेशी पालतू पशु बाजार और वन्यजीव संग्राहकों के बीच भारी मांग होने के कारण इनकी लगातार अवैध तस्करी की जाती है। इस तरह का अवैध व्यापार न केवल देश की जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि इन संरक्षित प्रजातियों के प्राकृतिक आवास और अस्तित्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। डीआरआई ने कहा कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ उसकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और इस दिशा में राज्य वन विभाग सहित अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उन्हें कहीं भी वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त या तस्करी की जानकारी मिले तो तत्काल संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करें, क्योंकि वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने में जनसहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।