- दान गबन मामले के बीच ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम

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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित दान गबन मामले ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने शुक्रवार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त दान में कथित गड़बड़ी की जांच तेज हो गई है। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की जांच विशेष जांच दल (SIT) की निगरानी में आगे बढ़ रही है।
SIT जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर
राम मंदिर में प्राप्त नकद दान और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन का मामला सबसे पहले 7 जून को सामने आया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिससे मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर 25 जून की रात एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद अयोध्या पुलिस ने शुक्रवार को आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं।
दान की गिनती से जुड़े कर्मचारियों पर गंभीर आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका मंदिर में आने वाले नकद दान और कीमती वस्तुओं की गिनती और उनके प्रबंधन से जुड़ी थी। आरोप है कि सुभाष चंद्र श्रीवास्तव दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की निगरानी करता था, जबकि अन्य आरोपी नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं की गिनती अथवा संबंधित प्रक्रिया में शामिल थे। एफआईआर में नामजद रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के चालक बताए जाते हैं। हालांकि टिन्नू यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया है कि वह कभी दान की गिनती की प्रक्रिया में शामिल नहीं रहा और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप ईर्ष्या और दुर्भावना से प्रेरित हैं। वहीं अन्य आरोपियों पर भी दान की रकम और कीमती सामान के प्रबंधन में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।
जांच जारी, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
दान गबन के इस मामले ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को नैतिक जवाबदेही के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि जांच एजेंसियां अभी पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि वित्तीय लेन-देन, दान की गिनती की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही कथित दान गबन की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।