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मुंबई। शिवसेना (Shiv Sena) के 60वें स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल देखने को मिला है। पार्टी की वर्षगांठ उत्सव के बजाय शक्ति प्रदर्शन और विरासत की लड़ाई का मंच बन गई है। एक ओर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना है, तो दूसरी ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी)। दोनों ही गुट खुद को बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और राजनीतिक विरासत का वास्तविक उत्तराधिकारी बता रहे हैं। ऐसे में स्थापना दिवस के मौके पर दोनों खेमों के बीच संघर्ष और भी तीखा हो गया है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ से उद्धव गुट को बड़ा झटका
एकनाथ शिंदे गुट द्वारा चलाए गए कथित “ऑपरेशन टाइगर” ने उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी है। इनमें परभणी के संजय जाधव, शिर्डी के भाऊसाहेब वाकचौरे, यवतमाल के संजय देशमुख, हिंगोली के नागेश पाटिल आष्टीकर, धाराशिव के ओमराजे निंबालकर और मुंबई उत्तर-पूर्व के संजय पाटिल शामिल हैं। ये सभी सांसद 19 जून को औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने जा रहे हैं। इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी, जिससे वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का तीसरा सबसे बड़ा दल बन सकता है। इस घटनाक्रम के संकेत कुछ दिन पहले मंत्री उदय सामंत ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट के जरिए दिए थे।
अस्तित्व बचाने की लड़ाई में उद्धव ठाकरे
लगातार हो रही टूट-फूट के बीच उद्धव ठाकरे का गुट अब केवल तीन सांसदों तक सिमटने की स्थिति में पहुंच गया है। इस संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर खुद को पार्टी का आधिकारिक और वैध स्वरूप मान्यता देने की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम पार्टी के अस्तित्व और पहचान को बचाने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए भावनात्मक संदेश देने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि वे पार्टी के मूल सिद्धांतों और बालासाहेब की विरासत के नाम पर कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश करेंगे।
बालासाहेब की विरासत पर सियासी संघर्ष
वर्ष 2026 शिवसेना और ठाकरे परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है। यह वर्ष पार्टी के 60वें स्थापना वर्ष के साथ-साथ संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी का भी प्रतीक है। 19 जून 1966 को स्थापित शिवसेना ने शुरुआत में मराठी मानुष के अधिकारों की आवाज उठाई थी, लेकिन बाद में हिंदुत्व की प्रमुख राजनीतिक ताकत बन गई। आज दोनों गुट उसी विरासत पर अपना दावा जता रहे हैं। शिंदे गुट खुद को बालासाहेब की मूल हिंदुत्ववादी विचारधारा का सच्चा वाहक बता रहा है, जबकि उद्धव ठाकरे अपने पारिवारिक और राजनीतिक संबंधों के आधार पर स्वयं को उस विरासत का वास्तविक संरक्षक मानते हैं। ऐसे में शिवसेना का यह 60वां स्थापना दिवस केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भविष्य की दिशा तय करने वाला अहम मोड़ बन गया है।