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नागपुर। हुडकेश्वर क्षेत्र के स्वागत नगर में मंगलवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब एक घर की रसोई में अत्यंत विषैले कॉमन करैत सांप के होने की जानकारी मिली। समय रहते परिवार की सतर्कता और सर्पमित्र की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना रात करीब 11 बजे स्वागत नगर स्थित राजेश गुप्ता के घर की है। परिवार के सदस्य घर में टीवी देख रहे थे, तभी राजेश गुप्ता की पत्नी भोजन बनाने के लिए रसोई में पहुंचीं। वहां उन्होंने सब्जियों की टोकरी के पास काले रंग की किसी रस्सी जैसी वस्तु देखी। जैसे ही वह उसे उठाने के लिए आगे बढ़ीं, वह अचानक सरकने लगी, जिससे उनके होश उड़ गए।
परिजनों ने दिखाई सूझबूझ, सर्पमित्र को दी सूचना
घबराई महिला ने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों को आवाज लगाई। सभी लोग रसोई में पहुंचे तो पता चला कि वह कोई रस्सी नहीं, बल्कि सांप था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजेश गुप्ता ने तत्काल स्थानीय सर्पमित्र शुभम पराले से संपर्क किया। सूचना मिलते ही शुभम कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंचे और रसोई में सांप की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद सांप सब्जियों की टोकरी के नीचे छिपा हुआ मिला। सर्पमित्र ने सभी लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी और सावधानीपूर्वक सांप को पकड़कर सुरक्षित कंटेनर में रखा।
कॉमन करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में शामिल
जांच के दौरान सांप की पहचान कॉमन करैत (Common Krait) के रूप में हुई, जिसे भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है। सर्पमित्र शुभम पराले ने बताया कि करैत का न्यूरोटॉक्सिक विष सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और सांस लेने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सांप दिखने पर घबराएं नहीं और न ही स्वयं उसे पकड़ने का प्रयास करें। ऐसी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित सर्पमित्र या वन विभाग से संपर्क करना चाहिए। रेस्क्यू के बाद सांप को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
मानसून में बढ़ जाते हैं सांपों के मामले
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान सांपों के रिहायशी इलाकों में आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि वे आश्रय और सूखी जगहों की तलाश में घरों की ओर रुख करते हैं। ऐसे समय में नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस घटना में परिवार की सतर्कता और सर्पमित्र की त्वरित कार्रवाई के कारण न केवल परिवार सुरक्षित रहा, बल्कि सांप को भी बिना नुकसान पहुंचाए उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।