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नागपुर। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि उनकी संगठन की चुनाव लड़ने की कोई योजना नहीं है। मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने मूल अधिकारों की मांग करने के लिए चुनाव लड़ने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए देशव्यापी आंदोलन जारी रखने का ऐलान भी किया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा
संविधान चौक पर आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा कॉकरोच मास्क पहनकर तथा तख्तियां लेकर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षा अनियमितताओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ‘मन की बात’ और ‘परीक्षा पे चर्चा’ करती है, लेकिन छात्रों की वास्तविक समस्याओं को सुनने की जरूरत है। दीपके का कहना था कि यदि सरकार छात्रों से नियमित संवाद स्थापित करे तो उनकी समस्याओं का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है।
प्रदर्शन लोकतंत्र की आत्मा, युवाओं से जुड़ने की अपील
दीपके ने विरोध प्रदर्शनों को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि भारत आज जिस लोकतांत्रिक स्वरूप में है, उसमें आंदोलनों और जनप्रदर्शनों की बड़ी भूमिका रही है। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों द्वारा नारेबाजी किए जाने से तनाव की स्थिति बनी, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने समय रहते हालात नियंत्रित कर लिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आंदोलन को ‘अराजकतावादी’ बताए जाने पर दीपके ने कहा कि यदि छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना अराजकता है, तो वह इसे स्वीकार करने को तैयार हैं। उन्होंने युवाओं से धर्म आधारित राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
‘देश बदलने के लिए फकीर बनना जरूरी नहीं’
अमेरिका में शिक्षित अभिजीत दीपके ने अपने सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उठने वाले सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि समाज सेवा करने के लिए व्यक्ति का गरीब या फकीर होना जरूरी नहीं है। संपन्न परिवार से आने वाले और आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी समाज और देश के लिए योगदान दे सकते हैं। दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों के मुद्दों का समाधान नहीं होता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।