ठाकरे की शिवसेना में बढ़ा असंतोष, गढ़चिरौली से लातूर तक संगठन में घमासान

    13-Jun-2026
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Thackeray Shiv Sena
 Image Source:(Internet)
 
मुंबई/गढ़चिरौली/लातूर। शिवसेना (Shiv Sena) (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में इन दिनों आंतरिक असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। एक ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना द्वारा ठाकरे गुट के सांसदों को अपने पक्ष में लाने के लिए कथित तौर पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ चलाए जाने की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी संगठन के भीतर भी नाराजगी और विरोध के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच उद्धव ठाकरे ने अपने सभी सांसदों की बैठक मंगलवार को ‘मातोश्री’ में बुलाई है। दूसरी तरफ, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे मराठवाड़ा दौरे पर हैं, जहां संगठनात्मक समीक्षा बैठकों के दौरान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। गढ़चिरौली और लातूर की घटनाओं ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
पद से हटाए जाने के बाद जिला प्रमुख ने पार्टी कार्यालय में की तोड़फोड़
गढ़चिरौली में शिवसेना (यूबीटी) के पूर्व जिला प्रमुख वासुदेव शेडमाके द्वारा पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व द्वारा नई नियुक्तियों की घोषणा के बाद शेडमाके नाराज हो गए। संगठन ने गढ़चिरौली और आरमोरी विधानसभा क्षेत्रों के लिए पवन गेडाम तथा अहेरी क्षेत्र के लिए दिलीप सुरपाम को जिला प्रमुख नियुक्त किया है। इसके बाद कथित तौर पर शेडमाके ने पार्टी कार्यालय में लगे पीओपी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और कार्यालय से टेबल, कुर्सियां, पंखे, एयर कंडीशनर तथा बल्ब तक हटाकर अपने साथ ले गए। इस घटना ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
लातूर में अंबादास दानवे की बैठक में भी मचा हंगामा
इधर, लातूर में आयोजित जिला समीक्षा बैठक के दौरान भी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बैठक में अंबादास दानवे मौजूद थे और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान मंच से बोल रहे एक पदाधिकारी ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की तुलना करते हुए कुछ टिप्पणियां कीं। इन टिप्पणियों पर बैठक में मौजूद कुछ कार्यकर्ता नाराज हो गए और उन्होंने विरोध जताना शुरू कर दिया। देखते ही देखते सभा स्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति बन गई। हालांकि, अंबादास दानवे ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कार्यकर्ताओं को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद बैठक का शेष कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती
गढ़चिरौली और लातूर की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संगठनात्मक स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता हालिया नियुक्तियों तथा संगठनात्मक निर्णयों को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे समय में जब राजनीतिक स्तर पर भी पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, संगठन के भीतर उभरते मतभेद नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं। आगामी बैठकों और नेतृत्व के फैसलों पर अब पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे और वरिष्ठ नेता जल्द ही संगठन में एकजुटता बनाए रखने तथा असंतोष को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।