Impact of El Niño : महाराष्ट्र में इस साल कम बारिश के संकेत, जून में बढ़ सकती है गर्मी

    29-May-2026
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- IMD ने घटाया मॉनसून बारिश का अनुमान
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एबी न्यूज़ नेटवर्क। इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने इस साल देशभर में मॉनसून बारिश को लेकर अपना अनुमान कम कर दिया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एल नीनो के प्रभाव के कारण इस बार औसत से कम बारिश होने की संभावना है। इससे पहले अप्रैल में IMD ने देश में सामान्य बारिश के 92 प्रतिशत तक वर्षा का अनुमान जताया था, लेकिन अब इसे घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 90 प्रतिशत बारिश भी सामान्य से कम मानी जाती है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक के.एस. होसलीकर ने कहा कि महाराष्ट्र में भी इसका असर देखने को मिलेगा और कई क्षेत्रों में बारिश की कमी महसूस हो सकती है। खासतौर पर मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में कम वर्षा की आशंका जताई गई है।

जुलाई-अगस्त में बढ़ेगा एल नीनो का प्रभाव
के.एस. होसलीकर के मुताबिक, जून महीने में एल नीनो का असर ज्यादा सक्रिय नहीं रहेगा, लेकिन जुलाई, अगस्त और सितंबर में इसका प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ेगा। सितंबर में इसका असर सबसे अधिक रहने की संभावना है, जिससे मॉनसून कमजोर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि एल नीनो वाले साल आमतौर पर अधिक गर्म माने जाते हैं और इस बार जून में कुछ इलाकों में हीट वेव यानी लू चलने की भी आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, केरल में मॉनसून की एंट्री के बाद सामान्य रूप से इसे राजस्थान तक पहुंचने में 40 से 45 दिन लगते हैं। यदि मॉनसून की प्रगति धीमी होती है तो उत्तर और मध्य भारत के साथ महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी तेज गर्मी का असर बना रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम बारिश का सीधा असर खेती, पेयजल, बिजली उत्पादन और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

किसानों और जल संकट को लेकर बढ़ी चिंता
मौसम विशेषज्ञ मयूरेश प्रभुणे ने बताया कि IMD ने इस बार औसत से कम बारिश की संभावना करीब 60 प्रतिशत तक जताई है। उनका कहना है कि यदि जुलाई और अगस्त में एल नीनो ज्यादा सक्रिय होता है तो महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से काफी कम रह सकती है। इससे खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कम बारिश के कारण जलाशयों का जलस्तर प्रभावित हो सकता है, जिसका असर अगले साल तक देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसल योजना बनाने की सलाह दी है। वहीं प्रशासन को भी पानी और बिजली की संभावित चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी करने की जरूरत बताई जा रही है।