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जबलपुर। जबलपुर के बरगी डैम (Bargi Dam) में हुए दर्दनाक क्रूज बोट हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुक्रवार सुबह जब सेना और राहत दल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, तभी एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। राहतकर्मियों को नौवीं और आठवीं लाश एक साथ मिली एक मां और उसका चार साल का बेटा। महिला की पहचान 39 वर्षीय मरीना मैसी और बच्चे की पहचान त्रिशान के रूप में हुई है। दोनों दिल्ली से छुट्टियां मनाने आए थे। हादसे के बाद जब उनकी लाशें पानी से बाहर निकाली गई, तब भी बच्चा अपनी मां की बाहों में कसकर लिपटा हुआ था। यह दृश्य वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर गया।
डूबती नाव में बेटे को बचाने की आखिरी कोशिश
राहतकर्मियों के मुताबिक, मां और बेटे दोनों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन हादसे के दौरान वे नाव के निचले केबिन में फंस गए। अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही नाव में तेजी से पानी भरना शुरू हुआ, मरीना ने अपने बेटे को अपनी लाइफ जैकेट के भीतर समेट लिया ताकि उसे ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा मिल सके। एक अधिकारी ने बताया कि बंद केबिन में पानी भरने के बाद यात्रियों के पास बाहर निकलने के लिए केवल कुछ सेकंड ही बचे होंगे। ऐसे में घबराहट और दबाव के बीच बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया। राहत दल के एक सदस्य ने बताया, “जब हमने दोनों को बाहर निकाला, तब भी मां अपने बेटे को सीने से लगाए हुए थी। ऐसा लग रहा था मानो आखिरी सांस तक वह उसे बचाने की कोशिश करती रही।”
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
हादसे के बाद अब सुरक्षा इंतजामों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नाव में बच्चों के लिए अलग से लाइफ जैकेट क्यों उपलब्ध नहीं थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों के लिए उचित सुरक्षा उपकरण होते, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि निचले केबिन में पानी तेजी से भरने के कारण यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। प्रशासन अब हादसे के तकनीकी कारणों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों की भी जांच कर रहा है।
परिवार बचा, लेकिन हमेशा के लिए टूट गया संसार
इस हादसे में जहां मरीना और उनका बेटा त्रिशान जिंदगी की जंग हार गए, वहीं उनके पति प्रदीप मैसी और बेटी सिया को सुरक्षित बचा लिया गया। लेकिन परिवार ने एक ही पल में अपने दो सबसे अहम सदस्यों को खो दिया। बरगी डैम का ये हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मां की ममता और अंतिम संघर्ष की ऐसी कहानी बन गया है, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है। मां की बाहों में सिमटा वह मासूम बच्चा अब इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक तस्वीर बन चुका है।