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एबी न्यूज़ नेटवर्क। मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। ईरान ने बुधवार को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह कदम उस समय उठाया गया, जब डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही तेहरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। व्हाइट हाउस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान से जलडमरूमध्य तुरंत खोलने की अपील की है और इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बताया है।
इजरायल के हमले और युद्धविराम पर विवाद
ईरान के इस फैसले के पीछे इजरायल द्वारा लेबनान में किए गए हमलों को कारण बताया जा रहा है। ईरान की सरकारी एजेंसी के अनुसार, इजरायल ने हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर करीब 100 हवाई हमले किए, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई। हालांकि इजरायल का कहना है कि लेबनान युद्धविराम के दायरे में नहीं आता, लेकिन ईरान ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी युद्धविराम को सभी मोर्चों पर लागू होना चाहिए। इस बीच ईरानी सांसद इब्राहिम रेज़ाई ने इस कदम का बचाव करते हुए इसे “जायोनी आक्रामकता” के खिलाफ प्रतिक्रिया बताया।
वैश्विक असर और अनिश्चित भविष्य
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है, ऐसे में इसके बंद होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। शुरुआत में दो जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में पूरी तरह से आवाजाही रोक दी गई। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का दावा है कि अमेरिका ने इस जलमार्ग पर तेहरान के नियंत्रण को स्वीकार किया है, जबकि ट्रंप ने इसे युद्धविराम की प्रमुख शर्त बताया था। मौजूदा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में शांति बेहद नाजुक है और हालात कभी भी और बिगड़ सकते हैं।