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एबी न्यूज नेटवर्क। फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में ANSES की रिपोर्ट के आधार पर स्मोकलेस तंबाकू उत्पादों पर अपना आधिकारिक रुख अपडेट किया है। 2,500 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा के बाद एजेंसी ने माना कि ये उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन पारंपरिक सिगरेट की तुलना में इनसे होने वाला नुकसान काफी कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि स्मोकलेस उत्पादों में दहन (जलना) नहीं होता, जबकि सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक जहरीले रसायन पाए जाते हैं, जो फेफड़ों और हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी पर्याप्त ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है, इसलिए जोखिम को “संभावित” माना गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलती रणनीति
फ्रांस के अलावा कई देशों में तंबाकू नियंत्रण को लेकर दृष्टिकोण में बदलाव देखा जा रहा है। United Kingdom ने 2023 में “Swap to Stop” कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत स्मोकलेस उत्पादों और काउंसलिंग के जरिए धूम्रपान छोड़ने में मदद दी जा रही है। इस पहल के माध्यम से अब तक लगभग 1.25 लाख लोगों ने सिगरेट छोड़ने की कोशिश की है। वहीं Japan में हीटेड तंबाकू उत्पादों को अपनाने के बाद सिगरेट पर लौटने की दर सिर्फ 0.5-1% दर्ज की गई। South Korea में भी ऐसे उत्पादों का बाजार हिस्सा 10.6% तक पहुंच चुका है, जहां 99.4% उपयोगकर्ता पहले से धूम्रपान करने वाले या पूर्व धूम्रपानकर्ता हैं।
हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक संकेत
European Journal of Cardiology में प्रकाशित एक दक्षिण कोरियाई अध्ययन के अनुसार, जिन हृदय रोगियों ने पूरी तरह स्मोकलेस तंबाकू अपनाया, उनमें हृदय संबंधी जोखिम उतना ही कम हुआ जितना सिगरेट छोड़ने पर होता है। शोधकर्ताओं ने इसका कारण टार और कार्बन मोनोऑक्साइड की अनुपस्थिति को बताया, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा, University College London की डॉ. वेरा बुस के अनुसार, स्मोकलेस उत्पादों का उपयोग करने वाले लोगों में धूम्रपान छोड़ने की सफलता दर अन्य निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी की तुलना में लगभग 50% अधिक पाई गई है।
भारत के लिए नीति-निर्माण का अवसर
भारत में तंबाकू नियंत्रण को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, जैसे बड़े चेतावनी चित्र और जागरूकता अभियान। इसके बावजूद तंबाकू से जुड़ी बीमारियां अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में वैश्विक अनुभवों के आधार पर भारत के लिए यह समय हो सकता है कि वह तंबाकू उत्पादों के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए नीतियों की समीक्षा करे। हार्म रिडक्शन (नुकसान में कमी) का मतलब यह नहीं है कि नुकसान को स्वीकार किया जाए, बल्कि यह समझना है कि लाखों लोगों के लिए धूम्रपान छोड़ने की दिशा में एक मध्यवर्ती कदम अधिक व्यावहारिक हो सकता है।