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नागपुर। नागपुर महानगरपालिका (NMC) के क्रीड़ा विभाग पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। विभाग द्वारा धरमपेठ जोन के गांधीनगर स्थित एक कथित रूप से अवैध स्केटिंग रिंक के नवीनीकरण और विकास के लिए 43 लाख रूपये का टेंडर जारी किए जाने से विवाद गहरा गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह जमीन डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशंस (DCR) 2000 के तहत 15% ओपन स्पेस के रूप में आरक्षित सार्वजनिक खेल मैदान है, जहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद इस पर टेंडर जारी करना नियमों का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है।
तीन दशक से बिना अनुमति संचालित स्केटिंग क्लब
जानकारी के अनुसार, यह भूखंड मूल रूप से Nagpur Improvement Trust (NIT) द्वारा 30 साल की लीज पर आवंटित किया गया था, जिसे स्थानीय निवासियों की सामूहिक संपत्ति माना जाता है। आरोप है कि पिछले लगभग तीन दशकों से यहां शिवाजी स्केटिंग क्लब बिना किसी आधिकारिक अनुमति के संचालित हो रहा है। क्लब के सचिव कृष्णा बैसवारे पर यह भी आरोप है कि वे इस सार्वजनिक मैदान पर बच्चों के लिए कोचिंग क्लासेस चलाकर प्रति बच्चा करीब 1000 रूपये मासिक शुल्क वसूल रहे हैं और निजी लाभ कमा रहे हैं। निवासियों का दावा है कि इस गतिविधि से संबंधित कोई भी राजस्व न तो NMC और न ही NIT के खजाने में जमा किया गया है।
मामला लंबित, फिर भी जारी हुआ टेंडर
मामले को और गंभीर बनाते हुए, यह भी सामने आया है कि इस विवाद से जुड़ा एक प्रकरण Bombay High Court Nagpur Bench में लंबित है। इसके बावजूद NMC के क्रीड़ा अधिकारी पीयूष अंबुलकर द्वारा 43 लाख रूपये का टेंडर जारी किया जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने इस कदम को अवैध और मनमाना बताते हुए टेंडर को तुरंत रद्द करने, सार्वजनिक भूमि के कथित दुरुपयोग की उच्चस्तरीय जांच कराने और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।