- 15 अप्रैल से आवेदन शुरू
एबी न्यूज़ नेटवर्क। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध Melghat Tiger Reserve में इस वर्ष 1 और 2 मई 2026 को वॉटरहोल गणना के साथ ‘निसर्ग अनुभव 2026’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इससे पहले Navegaon-Nagzira Tiger Reserve में इस तरह का आयोजन घोषित किया गया था। मेळघाट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि इस विशेष पहल के तहत प्रकृति प्रेमियों को वन्यजीवों के व्यवहार और संरक्षण गतिविधियों को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा। कुल 261 प्रतिभागियों का चयन ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और पात्रताइस कार्यक्रम के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे से शुरू होकर 17 अप्रैल को शाम 5 बजे तक चलेगी। इच्छुक प्रतिभागियों को गूगल फॉर्म के जरिए व्यक्तिगत रूप से आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 60 वर्ष निर्धारित की गई है। प्रत्येक आवेदन के साथ ₹200 का नॉन-रिफंडेबल शुल्क अनिवार्य है। चयनित उम्मीदवारों को ईमेल के माध्यम से सूचना दी जाएगी, जिसके बाद उन्हें 22 अप्रैल तक ऑनलाइन सहभागिता शुल्क जमा कर अपनी जगह सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, एक साइन किया हुआ इंडेम्निटी बॉन्ड जमा करना भी जरूरी रहेगा।
विभिन्न वन क्षेत्रों के लिए अलग शुल्ककार्यक्रम के तहत अलग-अलग वन क्षेत्रों के लिए सहभागिता शुल्क तय किया गया है। मेळघाट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले सिपना, गुगामल, अकोट और मेलघाट वन्यजीव विभाग क्षेत्रों के लिए शुल्क 3,500 रूपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। वहीं, पांढरकवाड़ा वन्यजीव विभाग (टीपेश्वर और पैनगंगा अभयारण्य) के लिए 4,000 रूपये और अकोला वन्यजीव विभाग (ज्ञानगंगा, काटेपूर्णा और करंजा सोहोल अभयारण्य) के लिए 2,000 रूपये प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क प्रतिभागियों को मिलने वाली सुविधाओं और स्थान के आधार पर तय किया गया है।
मचान आवंटन और सुविधाएंकार्यक्रम के दौरान मचान का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक मचान पर एक प्रतिभागी के साथ वन विभाग का एक कर्मचारी मौजूद रहेगा। अंतिम चयन और मचान आवंटन का अधिकार पूरी तरह से रिजर्व प्रशासन के पास होगा और उसका निर्णय अंतिम माना जाएगा। प्रतिभागियों को 1 मई की रात का पैक्ड डिनर और 2 मई की सुबह का नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही पूरे कार्यक्रम के दौरान पीने के पानी की व्यवस्था भी की जाएगी। यह आयोजन वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रकृति से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।