तेंदुए के डर के बीच ‘स्मार्ट केज’ की उम्मीद की किरण

    15-Apr-2026
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एबी न्यूज़ नेटवर्क। विदर्भ और मराठवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं का बढ़ता खतरा अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। खेतों में काम करने से लेकर रात में घर से बाहर निकलने तक, हर कदम डर के साए में उठाया जा रहा है। ऐसे माहौल में Rashtrasant Tukadoji Maharaj Nagpur University के शोधकर्ताओं ने एक अनोखा समाधान पेश किया है एल्युमीनियम से बना ‘स्मार्ट केज’। यह नवाचार न सिर्फ तेंदुओं के हमलों से बचाव का दावा करता है, बल्कि आसपास के लोगों को अलर्ट कर मदद पहुंचाने में भी सक्षम है।

रिसर्चर्स का अनोखा आविष्कार
इस ‘स्मार्ट केज’ को यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर Dr. Sanjay Janrao Dhoble और Dr. Amit Ramesh Bansod ने मिलकर विकसित किया है। इस डिजाइन को भारतीय पेटेंट कार्यालय से रजिस्ट्रेशन भी मिल चुका है। केज का ढांचा जालीदार है, जो सिर से लेकर पीठ तक फिट होता है। जैसे ही तेंदुआ हमला करता है, इसमें लगे हुक को खींचते ही यह पूरे शरीर के चारों ओर सुरक्षा कवच बना लेता है। यह हल्का, उपयोग में आसान और रोजमर्रा की परिस्थितियों के लिए अनुकूल बनाया गया है।

स्पीकर और अलार्म से भागेगा तेंदुआ
इस स्मार्ट केज की सबसे खास बात इसमें लगे आठ स्पीकर हैं, जो खतरा महसूस होते ही सक्रिय हो जाते हैं। ये स्पीकर एक साथ “बचाओ-बचाओ”, ढोल और तेज आवाजों जैसे सिग्नल पैदा करते हैं। इससे तेंदुआ डरकर भाग जाता है और आसपास के लोग भी तुरंत सतर्क हो जाते हैं। केज के निचले हिस्से में मजबूत पकड़ के लिए स्टैंड दिया गया है, जिससे व्यक्ति खुद को सुरक्षित स्थिति में रख सकता है। इसके स्पीकर को आसानी से घर पर चार्ज किया जा सकता है, जिससे यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी बनती है।

बढ़ते हमलों के बीच बड़ी जरूरत
विदर्भ और मराठवाड़ा में तेंदुओं के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे किसान, मजदूर, छात्र और आम नागरिकों में भय का माहौल है। जंगलों का घटता क्षेत्र और पानी की कमी जंगली जानवरों को गांवों की ओर आने पर मजबूर कर रही है। कई घटनाओं में जानमाल का नुकसान भी हुआ है। ऐसे में यह स्मार्ट केज लोगों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। यूनिवर्सिटी की कुलगुरु Dr. Manali Kshirsagar समेत अन्य अधिकारियों ने इस शोध की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामाजिक उपयोग वाले नवाचार भविष्य में मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।