शांति और संवाद को बढ़ावा देने के लिए निर्णय

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। केंद्र सरकार ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की नजरबंदी रद्द करने की घोषणा की। पिछले साल सितंबर में लद्दाख के लेह में हुए प्रदर्शनों के बाद उन्हें National Security Act (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था और बाद में राजस्थान के जोधपुर स्थित जेल में रखा गया था। गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया गया है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार लद्दाख में शांतिपूर्ण माहौल और आपसी विश्वास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी पक्षों के साथ सार्थक और रचनात्मक संवाद संभव हो सके।
लेह में प्रदर्शनों के बाद हुई थी गिरफ्तारी
गृह मंत्रालय के अनुसार Sonam Wangchuk को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद की गई थी। दरअसल 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वांगचुक अपनी निर्धारित नजरबंदी अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने NSA के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उनकी नजरबंदी तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया।
प्रदर्शनों से जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर असर
सरकार का कहना है कि लद्दाख में लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं को समझने के लिए समुदाय के नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि क्षेत्र में लगातार हो रहे बंद और प्रदर्शनों के कारण कई वर्ग प्रभावित हुए हैं। खासकर छात्र, नौकरी की तैयारी कर रहे युवा, व्यवसायी, टूर ऑपरेटर और पर्यटक इससे प्रभावित हुए हैं। इन परिस्थितियों का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ा है। सरकार का मानना है कि बातचीत और सहयोग के जरिए ही क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल की जा सकती है और विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।