- अस्थिर मौसम का असर कई क्षेत्रों में

Image Source:(Internet)
एबी न्यूज़ नेटवर्क। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में मौसम के अचानक बदलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों में बादल छाए रहने, रुक-रुक कर बारिश, गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। इस बदलते मौसम को देखते हुए किसानों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर रबी की खड़ी फसलों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के कुछ जिलों में मौसम अस्थिर रहने का अनुमान लगाया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में इन क्षेत्रों में वातावरण में नमी बढ़ने और बादल छाने की स्थिति बनी रह सकती है।
18 से 20 मार्च के बीच बढ़ेगी गतिविधि
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक राज्य में मौसम संबंधी गतिविधियां 18 मार्च से तेज होने की संभावना है। 18 से 20 मार्च के बीच कई स्थानों पर तेज बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। यदि ऐसा होता है तो खेतों में तैयार खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस दौरान कुछ क्षेत्रों में बारिश का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।
रबी फसलों को लेकर बढ़ी चिंता
राज्य में इस समय रबी फसलों की कटाई का मौसम चल रहा है। ऐसे में अचानक होने वाली बारिश या ओलावृष्टि से गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों को नुकसान होने की आशंका है। कई किसान पहले से ही कटाई और फसल भंडारण की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं, इसलिए मौसम में यह बदलाव उनके लिए चुनौती बन सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेज बारिश या ओले गिरते हैं तो तैयार फसलें खराब हो सकती हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
कृषि विभाग ने जारी की सलाह
संभावित मौसम को देखते हुए राज्य के कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों से कहा है कि वे मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर लगातार नजर रखें और अपने खेतों में खड़ी फसलों तथा कटाई के बाद रखे गए अनाज की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें और बारिश या तेज हवाओं से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। अधिकारियों ने कहा कि सतर्कता बरतकर संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।