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नागपुर। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी ने वित्तीय वर्ष 2026–2027 के लिए 855 करोड़ 88 लाख 85 हजार रुपये का बजट संशोधनों के साथ मंजूर कर लिया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय की आम सभा की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की। बैठक में रजिस्ट्रार डॉ. राजू हिवसे तथा वित्त एवं लेखा अधिकारी हरीश पालीवाल सहित प्रबंधन परिषद के सदस्य उपस्थित थे। प्रबंधन परिषद सदस्य और प्राचार्य डॉ. नीलकंठ यादोराव लांजे ने बजट प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह बजट सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा, शोध और विद्यार्थियों के विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
सीमित संसाधनों में संतुलन बनाने की चुनौती
बजट प्रस्तुति के दौरान बताया गया कि विश्वविद्यालय की आय का प्रमुख स्रोत सरकारी अनुदान और विद्यार्थियों तथा महाविद्यालयों से मिलने वाली फीस है। सरकारी सहायता मुख्य रूप से वेतन व्यय तक ही सीमित रहती है, जबकि विश्वविद्यालय को रखरखाव, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षणिक गतिविधियों पर भी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में बढ़ती लागत और सीमित आय के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। इसी कारण बजट को उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग और प्राथमिकताओं के आधार पर खर्च तय करने की नीति के साथ तैयार किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में गैर-परंपरागत आय के स्रोत बढ़ाने और अनुत्पादक खर्चों पर नियंत्रण करने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है।
आय और व्यय का अनुमान
वित्तीय वर्ष 2026–2027 के लिए विश्वविद्यालय की कुल अनुमानित आय 733 करोड़ 40 लाख 54 हजार रुपये आंकी गई है, जबकि कुल व्यय *855 करोड़ 88 लाख 85 हजार रुपये रहने का अनुमान है। इस प्रकार बजट में लगभग 122 करोड़ 48 लाख 31 हजार रुपये का घाटा दर्शाया गया है। पिछले वर्ष 2025–2026 के मूल बजट में 81 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा अनुमानित था, जिसे बचत उपायों के माध्यम से कम करने का प्रयास किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आगामी वर्ष में भी खर्चों को नियंत्रित करने और नए आय स्रोत विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
भवन निर्माण और अधोसंरचना पर जोर
बजट में विश्वविद्यालय की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए 76 करोड़ 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत इनडोर स्टेडियम के लिए 33 करोड़ रुपये, विभिन्न परिसरों के विकास के लिए 8 करोड़ रुपये तथा डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर स्कूल ऑफ लॉ की नई इमारत के लिए राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा शारीरिक शिक्षा विभाग, औषधि विज्ञान विभाग, परीक्षा परिसर, अतिथि गृह, कन्या छात्रावास और उन्नत कौशल विकास केंद्र के निर्माण तथा विकास के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और अन्य सुविधाओं के रखरखाव एवं मरम्मत के लिए 27 करोड़ 5 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं।
परीक्षा प्रणाली का कंप्यूटरीकरण और शिक्षक व्यवस्था
परीक्षा विभाग को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए इसके कंप्यूटरीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। परीक्षा विभाग के लिए कुल 59 करोड़ 62 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 6 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय का अपना ईआरपी सिस्टम विकसित करने तथा आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए रखे गए हैं। वहीं शिक्षकों की कमी को देखते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक नुकसान को रोकने के लिए कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के वेतन हेतु 3 करोड़ 35 लाख रुपये और क्लॉक-आवर आधार पर कार्यरत शिक्षकों के लिए 10 करोड़ 33 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा शिक्षकों और महाविद्यालयों के शोध कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए 4 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
छात्र कल्याण और भविष्य की योजनाएं
बजट में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। छात्रवृत्ति के लिए 2 करोड़ रुपये, शैक्षणिक भ्रमण के लिए 14 लाख रुपये तथा छात्र कल्याण योजनाओं के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। छात्र सहायता, चिकित्सा सहायता और कल्याण निधि के लिए 95 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय पुस्तक मेले, नागपुर फिल्म महोत्सव, विज्ञान मेले और पर्यावरण पहल जैसे कार्यक्रमों के लिए भी राशि रखी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने, नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने, उद्योगों के साथ समन्वय बढ़ाने और पूर्व छात्रों तथा सीएसआर योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त निधि प्राप्त करने की योजना भी घोषित की है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इन पहलों के माध्यम से आने वाले वर्षों में वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और शिक्षा तथा शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकेंगी।