- नागपुर में एलपीजी आपूर्ति पर वैश्विक संकट की छाया

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नागपुर। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब नागपुर जैसे शहरों में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री आपूर्ति मार्गों में व्यवधान और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण शहर में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति अनियमित होने लगी है। जो संकट पहले दूर देशों की खबरों तक सीमित लगता था, वह अब स्थानीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है। गैस एजेंसियों के सामने अचानक बढ़ी मांग को पूरा करना चुनौती बन गया है, जिससे शहर के व्यवसायों और घरों में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है।
रेस्तरां और फूड वेंडर्स पर सबसे ज्यादा असर
एलपीजी संकट का सबसे बड़ा प्रभाव होटल और खानपान क्षेत्र पर पड़ा है। बड़े रेस्तरां से लेकर सड़क किनारे के छोटे फूड स्टॉल तक, सभी को रोजमर्रा के काम के लिए आवश्यक कमर्शियल सिलेंडर मिलने में दिक्कत हो रही है। कई रेस्तरां संचालकों का कहना है कि गैस एजेंसियों के बुकिंग हेल्पलाइन नंबर लगातार व्यस्त या बंद मिल रहे हैं। शहर के एक कैफे संचालक ने बताया कि 11 मार्च को जब उन्होंने कमर्शियल सिलेंडर बुक करने की कोशिश की तो उन्हें लगभग 3,400 रूपये का भाव बताया गया, जो सामान्य कीमत से लगभग दोगुना है। इससे शहर में एलपीजी सिलेंडरों के संभावित काले बाजार की आशंका भी जताई जा रही है।
झुग्गी बस्तियों में कोयला और लकड़ी का सहारा
शहर की कई झुग्गी और निम्न आय वर्ग की बस्तियों में लोग एहतियात के तौर पर कोयला और जलाऊ लकड़ी जमा करने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलने के कारण वे वैकल्पिक ईंधन का इंतजाम कर रहे हैं ताकि खाना बनाने में परेशानी न हो। हालांकि पारंपरिक ईंधन का उपयोग करने से खाना बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और धुएं से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसके बावजूद कई परिवार इसे अस्थायी समाधान के रूप में अपना रहे हैं।
क्लब और बड़े प्रतिष्ठान भी प्रभावित
एलपीजी आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता का असर बड़े प्रतिष्ठानों पर भी पड़ने लगा है। शहर के एक प्रमुख क्लब ने 13 मार्च से अपने डाइन-इन सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है। क्लब प्रबंधन का कहना है कि बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध न होने के कारण यह कदम उठाना पड़ा। यह घटना दर्शाती है कि गैस आपूर्ति में आई अनियमितता का प्रभाव केवल छोटे व्यवसायों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थापित संस्थान भी इससे जूझ रहे हैं।
फूड डिलीवरी और टिफिन सेवाओं पर संकट
एलपीजी की कमी का असर गिग इकॉनमी पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कई रेस्तरां और क्लाउड किचन गैस की कमी के कारण ऑर्डर कम ले रहे हैं या अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जिससे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर की संख्या में भारी गिरावट आई है। डिलीवरी कर्मियों के अनुसार उनकी रोजाना की आय लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई है। जहां पहले वे प्रतिदिन 25 से 30 डिलीवरी करते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 10 रह गई है। इसके अलावा टिफिन सेवा संचालकों को भी बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए गैस नहीं मिल रही, जिसके कारण कई सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। इससे विशेष रूप से छात्र और नौकरीपेशा लोग प्रभावित हुए हैं जो रोजाना के भोजन के लिए इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
बिजली से खाना पकाने की ओर रुझान
स्थिति को देखते हुए नागपुर रेजिडेंशियल होटल्स एसोसिएशन ने होटल और रेस्तरां संचालकों को जहां संभव हो, वहां इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण जैसे इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक फ्रायर अपनाने की सलाह दी है। कई प्रतिष्ठानों को उन व्यंजनों को सीमित या हटाने के लिए भी कहा गया है जिन्हें अधिक गैस और समय की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, शहर में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ गई है। उपकरण विक्रेताओं के अनुसार जहां पहले महीने भर में लगभग 15 इंडक्शन स्टोव बिकते थे, वहीं पिछले दो दिनों में प्रतिदिन 30 से 40 यूनिट तक की बिक्री हो रही है। फिलहाल प्रशासन और व्यापारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला जल्द सामान्य होने पर एलपीजी की उपलब्धता भी सुधर जाएगी।