युद्ध के साये में साहस की उड़ान! 23 वर्षीय पायलट दीपिका अधाना ने 169 भारतीयों को सुरक्षित लौटाया

    13-Mar-2026
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- कहा, 'मॉम, बाय-बाय… पता नहीं मैं वापस आऊंगी या नहीं'
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एबी न्यूज़ नेटवर्क। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच जब कई देशों की उड़ानें रद्द हो रही थीं और यात्रियों में डर का माहौल था, उसी समय भारत की एक युवा पायलट ने साहस और जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया। फरीदाबाद की 23 वर्षीय पायलट दीपिका अधाना ने संकट की घड़ी में 169 भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने का मिशन पूरा किया। उड़ान भरने से ठीक पहले उन्होंने अपनी मां से कहा, “मॉम, बाय-बाय… पता नहीं मैं वापस आऊंगी या नहीं।” यह वाक्य उस समय के तनाव और अनिश्चितता को दर्शाता है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण भारत-मध्य-पूर्व मार्गों पर 28 फरवरी से 5 मार्च के बीच लगभग 1,770 उड़ानें रद्द हो चुकी थीं। ऐसे माहौल में यह रेस्क्यू मिशन केवल एक सामान्य उड़ान नहीं बल्कि साहस, कर्तव्य और मानवीय संवेदना की मिसाल बन गया।

अचानक मिला मिशन, दो घंटे में बदला फैसला

दीपिका अधाना, जो एयर इंडिया एक्सप्रेस में पायलट हैं, को 6 मार्च की सुबह लगभग 10:15 बजे अचानक सूचना मिली कि उन्हें संयुक्त अरब अमीरात के रास-अल-खैमाह के लिए उड़ान भरनी है। यह मिशन मूल रूप से उनकी एक सहकर्मी को करना था, लेकिन उड़ान से महज दो घंटे पहले दीपिका को उनकी जगह लेने का निर्देश दिया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी तरह महिला क्रू शामिल थी, जिसमें कैप्टन जसविंदर कौर, पायलट दीपिका अधाना और चार महिला क्रू सदस्य शामिल थीं। दीपिका ने बताया कि युद्ध जैसे हालात के कारण थोड़ी घबराहट जरूर थी, लेकिन सुरक्षा को लेकर उन्हें भरोसा दिलाया गया था। उन्होंने कहा कि क्रू ने इस उड़ान को भी उसी तरह संचालित किया जैसे किसी सामान्य दिन की फ्लाइट होती है।

उड़ान के दौरान तनावपूर्ण पल
विमान दोपहर करीब 2 बजे रास-अल-खैमाह एयरपोर्ट पर उतरा। दीपिका के अनुसार, एयरपोर्ट सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा शांत जरूर था, लेकिन वहां किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं थी। करीब एक घंटे के भीतर 169 भारतीय यात्रियों को विमान में बैठाया गया और वापसी की उड़ान शाम 3:30 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई। उड़ान के दौरान एक तनावपूर्ण क्षण तब आया जब टेकऑफ के समय कुछ देर के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क टूट गया। हालांकि यह तकनीकी समस्या ज्यादा देर नहीं रही और जल्द ही संपर्क फिर से स्थापित हो गया। अंततः विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, जहां कई यात्रियों ने क्रू का धन्यवाद किया और भावुक होकर उन्हें ‘रक्षक’ बताया।

दादा का सपना बना जीवन का लक्ष्य
फरीदाबाद के तिगांव क्षेत्र की रहने वाली दीपिका अधाना के पिता योगेश अधाना पेशे से आर्किटेक्ट हैं, जबकि उनकी मां बबली अधाना गृहिणी हैं। उनका बड़ा भाई मुंबई में बैंकिंग सेक्टर में कार्यरत है। दीपिका ने बताया कि पायलट बनने की प्रेरणा उन्हें अपने दिवंगत दादा अमृत सिंह अधाना से मिली, जिनका सपना था कि वह आसमान में उड़ान भरें। दीपिका ने 2020 में बल्लभगढ़ के टैगोर स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की तैयारी शुरू की। कोविड-19 महामारी के कारण उन्हें एक साल तक घर से पढ़ाई करनी पड़ी, लेकिन 2021 में उन्होंने अपना CPL हासिल कर लिया। बाद में मध्यप्रदेश के रीवा स्थित फाल्कन एविएशन अकादमी से 200 घंटे की उड़ान पूरी की और ग्रीस व इस्तांबुल में एयरबस A320 पर टाइप रेटिंग प्रशिक्षण प्राप्त किया। सितंबर 2023 में एयर इंडिया एक्सप्रेस की परीक्षा और इंटरव्यू पास करने के बाद अप्रैल 2024 में उन्होंने एयरलाइन जॉइन की और आज अपने साहस से देश का नाम रोशन कर रही हैं।