देश में सबसे अधिक प्रदूषित नदियां महाराष्ट्र में! विदर्भ भी चपेट में

    12-Mar-2026
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नागपुर। देश की जीवनदायिनी नदियां तेजी से प्रदूषित होती जा रही हैं। वर्ष 2025 में जारी सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार देशभर की 623 प्रमुख नदियों के अध्ययन में 271 नदियों में कुल 296 प्रदूषित हिस्से पाए गए हैं। रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया है कि महाराष्ट्र में अकेले 54 नदियां प्रदूषित श्रेणी में दर्ज की गई हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। इन नदियों में नागपुर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण नदियां भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में जल संकट और पर्यावरणीय खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है।

विदर्भ की प्रमुख नदियां भी प्रदूषण की चपेट में
रिपोर्ट के अनुसार विदर्भ क्षेत्र की कई प्रमुख नदियां प्रदूषण से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इनमें वैनगंगा, वर्धा, कन्हान नदी प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये नदियां नागपुर और आसपास के शहरों को पानी की आपूर्ति करती हैं, इसलिए इनके प्रदूषित होने से पेयजल की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार औद्योगिक कचरा, बिना उपचार के छोड़ा गया सीवेज और रासायनिक अपशिष्ट इन नदियों को तेजी से दूषित कर रहे हैं। कई जहरीले तत्व ऐसे हैं जो जल शोधन प्रक्रिया के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं होते, जिससे लंबे समय में मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

BOD और COD से मापा जाता है प्रदूषण स्तर
नदियों में प्रदूषण की स्थिति को मापने के लिए वैज्ञानिक मानकों का उपयोग किया जाता है। इसमें बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) प्रमुख हैं। स्वच्छ पानी में BOD का स्तर 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए, जबकि 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक होने पर इसे गंभीर प्रदूषण माना जाता है। इसी तरह COD का स्तर 20 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर होने पर रासायनिक प्रदूषण का संकेत मिलता है, जो आमतौर पर औद्योगिक अपशिष्ट से जुड़ा होता है। सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रदूषण के मामले में महाराष्ट्र के बाद केरला में 31 और मध्य प्रदेश तथा मणिपुर में 18-18 नदियां प्रदूषित पाई गई हैं, जो देश के जल संसाधनों पर बढ़ते संकट की ओर इशारा करती हैं।