
एबी न्यूज़ नेटवर्क। उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर में इस वर्ष से गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला बद्रीनाथ-केदारनाथ टेंपल कमिटी की बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह नियम आगामी तीर्थयात्रा सत्र से लागू किया जाएगा। नए प्रावधान के अनुसार गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर और गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस निर्णय के बाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
तीर्थयात्रा सत्र में लागू होगा नया नियम
समिति के अनुसार इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसी तीर्थयात्रा सत्र से प्रवेश संबंधी नया नियम लागू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम मंदिर की धार्मिक परंपराओं और आस्था की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक यह दोनों धाम केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि गहरे धार्मिक महत्व के केंद्र हैं, जहां लाखों श्रद्धालु हर वर्ष दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
परंपरा और संविधान का हवाला
समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की परंपरा प्राचीन काल से जुड़ी मानी जाती है और इसे आदि शंकराचार्य के समय से चली आ रही व्यवस्था बताया जाता है। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम वैदिक आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं, जिनकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। द्विवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि Article 26 of the Constitution of India के तहत हर धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार है। उनके अनुसार इसी संवैधानिक प्रावधान के आधार पर मंदिर समिति ने यह निर्णय लिया है, ताकि धामों की धार्मिक परंपराओं और आस्था की मर्यादा को बनाए रखा जा सके।