- एडवांटेज विदर्भ में एआई पर विशेषज्ञों की संगोष्ठी
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एबी न्यूज़ नेटवर्क।
एडवांटेज विदर्भ औद्योगिक महोत्सव के अंतर्गत एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (एआईडी) द्वारा “विकसित भारत 2047 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी एवं रोटरैक्ट सत्र का आयोजन नागपुर के मुख्य सभागार में किया गया। संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने में जेन-ज़ी (Gen Z) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को केवल तकनीक तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय विकास के व्यापक लक्ष्यों के साथ स्वयं को जोड़ना होगा, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व हासिल कर सके।
पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक का संतुलन
विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जेन-ज़ी को पारंपरिक भारतीय मूल्यों और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। वक्ताओं के अनुसार, तकनीकी नवाचार तभी प्रभावी और टिकाऊ होंगे जब वे समाज की जड़ों से जुड़े हों। महा स्ट्राइड, नागपुर डिवीजन के राजन पांधरे ने भारत के पहले स्मार्ट गांव ‘सातनवरी’ का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह एआई-सक्षम गांव महाराष्ट्र सरकार की पूंजीगत सहायता से पांच वर्षों में विकसित किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत कृषि में ड्रोन फार्मिंग, डिजिटल उपकरणों से कीटनाशक उपयोग की सटीक माप और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के सफल प्रयोग किए गए हैं।
स्किल गैप और अपस्किलिंग पर जोर
महाराष्ट्र सरकार के बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के प्रशिक्षण निदेशक एवं वरिष्ठ पैनलिस्ट प्रमोद नारायण जुमले ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत के पास विश्व की लगभग 16 प्रतिशत एआई प्रतिभा है और देश में 6 लाख से अधिक एआई पेशेवर मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में कौशल की मांग आपूर्ति से कहीं अधिक है। उन्होंने बढ़ते स्किल गैप पर चिंता व्यक्त करते हुए उभरती तकनीकों में त्वरित अपस्किलिंग की आवश्यकता बताई। समाधान के तौर पर उन्होंने अकादमिक पाठ्यक्रमों और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की दूरी को संरचित अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों से पाटने पर बल दिया। संगोष्ठी में इंफोसिस मिहान के राहुल करंगले, आईएमटी की डॉ. स्मिता सिंह डाभोलकर और ज़ेनकोडर के शांतनु विश्वनाथ जैसे विशेषज्ञ भी शामिल हुए। कार्यक्रम का समन्वय झूलेलाल इंस्टीट्यूट, नागपुर के प्रमोद पामपटवार ने किया।