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एबी न्यूज नेटवर्क।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद इलाके में बुधवार तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां तीन बहनों (Three sisters) ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतकों की पहचान निशिका (16), प्राची (14) और पाकी (12) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों बहनों ने अपने नौवीं मंज़िल स्थित फ्लैट की बालकनी से कूदकर जान दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
सुसाइड नोट में कोरियन कल्चर का जिक्र
पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट और डायरी बरामद हुई है, जिसमें बहनों ने कोरियन कल्चर, कोरियन एक्टर्स और के-पॉप ग्रुप्स के प्रति अपने गहरे लगाव का उल्लेख किया है। सुसाइड नोट में लिखा गया है, “हमें कोरियन बहुत पसंद है… कोरियन ही हमारी ज़िंदगी थी।” नोट में यह भी कहा गया है कि जो कुछ डायरी में लिखा है, वह पूरी तरह सच है। बहनों ने बार-बार अपने पिता से माफी मांगते हुए लिखा, “सॉरी पापा, मुझे बहुत अफसोस है।” पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नोट से यह संकेत मिलता है कि परिवार में उनके इस लगाव को सही ढंग से नहीं समझा गया।
मारपीट और शादी के दबाव का आरोप
सुसाइड नोट में बहनों ने भावनात्मक पीड़ा के साथ यह भी लिखा है कि उन्हें शारीरिक सजा दी जाती थी और शादी को लेकर दबाव महसूस हो रहा था। नोट की एक पंक्ति बेहद चौंकाने वाली है, “क्या हम सिर्फ इसलिए पैदा हुए थे कि हमें मारा जाए? नहीं… मार से बेहतर तो मौत लगती है।” बहनों ने यह भी लिखा कि वे कोरियन कलाकारों से प्रेम करती थीं, जबकि उनसे भारतीय लड़कों से शादी की अपेक्षा की जा रही थी, जिसे वे सहन नहीं कर पा रही थीं। इसी मानसिक संघर्ष को उन्होंने आत्महत्या का कारण बताया है।
जांच जारी, हर पहलू की हो रही पड़ताल
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है। सुसाइड नोट और डायरी की प्रामाणिकता की जांच के साथ-साथ पारिवारिक परिस्थितियों, बच्चों की मानसिक स्थिति और घटना से पहले की गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी तरह का दबाव, हिंसा या अन्य कारण इस कदम के पीछे जिम्मेदार थे। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर किशोरों की मानसिक सेहत, पारिवारिक संवाद और बच्चों पर पड़ने वाले सामाजिक दबावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।