Chhattisgarh : गोगुंडा में माओवादी नेता रमन्ना का स्मारक ध्वस्त! नक्सल प्रभाव खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

05 Feb 2026 14:56:00
- गोगुंडा में CRPF की कार्रवाई, सुरक्षा बलों की मजबूत मौजूदगी

ChhattisgarhImage Source:(Internet) 
 
एबी न्यूज़ नेटवर्क।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सुकमा जिले के गोगुंडा गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने गुरुवार को शीर्ष माओवादी नेता रवुला श्रीनिवास उर्फ रामन्ना के स्मारक को ध्वस्त कर दिया। रामन्ना माओवादियों की केंद्रीय समिति का सदस्य था और लंबे समय तक इस क्षेत्र में नक्सल आतंक का प्रतीक माना जाता रहा। CRPF की 74वीं बटालियन ने 20 नवंबर 2025 को गोगुंडा में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थापित किया था, जिसके बाद यह इलाका सुरक्षा बलों की पहुंच में आया। 74वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट विदेखो किय्ये ने बताया कि यह क्षेत्र वर्षों तक नक्सल नियंत्रण में था और सुरक्षा बलों के लिए पूरी तरह कट-ऑफ माना जाता था। स्मारक ध्वस्तीकरण की यह संयुक्त कार्रवाई आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी।
 
रमन्ना का आतंक और नक्सली हिंसा का काला इतिहास
रमन्ना वर्ष 2019 में हृदय गति रुकने से मारा गया था, लेकिन उससे पहले वह छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा का बड़ा चेहरा रहा। वर्ष 2010 में हुए सबसे घातक नक्सली हमले का मास्टरमाइंड रमन्ना ही था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा 2013 के झीरम घाटी हमले की योजना भी उसी ने बनाई थी, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित 28 लोगों की जान गई थी। सुरक्षा बलों का मानना है कि ऐसे स्मारक नक्सली विचारधारा को जीवित रखने का माध्यम बनते हैं, इसलिए उनका हटाया जाना क्षेत्र में शांति और विकास के लिए जरूरी है।
 
LWE हिंसा में ऐतिहासिक गिरावट
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में जानकारी दी कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) से जुड़ी हिंसा 2010 के मुकाबले 2025 में 88 प्रतिशत कम हुई है। जहां 2010 में 1936 हिंसक घटनाएं और 1005 मौतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर 234 घटनाएं और 100 मौतों तक सिमट गया। वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों ने 364 नक्सलियों को ढेर किया, 1022 को गिरफ्तार किया और 2337 नक्सलियों के आत्मसमर्पण को सुनिश्चित किया। फिलहाल केवल आठ जिले LWE से प्रभावित हैं, जिनमें से छह छत्तीसगढ़ में हैं। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद का पूर्ण उन्मूलन करना है। इस दिशा में गोगुंडा जैसे इलाकों में बिजली, पानी, स्कूल भवन और हेलीपैड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी तेजी से विकसित की जा रही हैं।
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