- मरीजों और परिजनों के लिए बेहतर इंतजाम
- नया धर्मशाला तैयार

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नागपुर।
इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल (IGGMCH) में बड़े स्तर पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। मरीजों के परिजनों के लिए एक नई धर्मशाला का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसमें 54 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। शुरुआती चरण में यह धर्मशाला महिलाओं के लिए आरक्षित रखी जाएगी, जबकि भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाने की योजना है। IGGMCH के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. रवि चौहान ने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग और निधि से अस्पताल का स्वरूप और स्वास्थ्य सेवाएं दोनों ही बेहतर होंगी। यह अस्पताल न केवल नागपुर और विदर्भ बल्कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी सेवाएं देता है।
छात्रों के लिए आधुनिक हॉस्टल और खेल सुविधाएं
छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए IGGMCH परिसर में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) छात्रों के लिए अलग-अलग जी+7 मंजिला हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक हॉस्टल में 400 छात्रों के रहने की क्षमता होगी। इसके अलावा छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए एक इंडोर स्टेडियम भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें बैडमिंटन, योग और जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अस्पताल परिसर में छात्रों और आगंतुकों के लिए हरियाली से युक्त उद्यान का भी विकास किया जा रहा है, जिससे अध्ययन और उपचार के बीच एक सकारात्मक वातावरण बने।
पार्किंग, सर्जिकल कॉम्प्लेक्स और नई इमारतें
अस्पताल में बढ़ते वाहनों की समस्या को देखते हुए जी+3 बहुस्तरीय पार्किंग सुविधा का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें लगभग 200 चारपहिया और 500 दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। सर्जिकल कॉम्प्लेक्स को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है, वहीं मेडिसिन विभाग को सर्जिकल कॉम्प्लेक्स से जोड़ने के लिए एक कवर्ड स्कायवॉक बनाया जा रहा है, ताकि बारिश या अत्यधिक मौसम में मरीजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके। अस्पताल में तीन नई ई-एम्बुलेंस भी जोड़ी गई हैं। इसके अलावा नया जी+7 डीन भवन तैयार हो चुका है, जिसमें स्किल लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, एमबीबीएस छात्रों के लिए लेक्चर हॉल और विभिन्न विभागीय प्रयोगशालाएं होंगी। पुराने कैजुअल्टी भवन को तोड़कर वहां 650 सीटों वाला ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, जबकि पेइंग वार्ड की संख्या बढ़ाकर मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग के मरीजों को आकर्षित करने की योजना भी बनाई गई है।