Silver Scam से हिला बाजार! डब्बा ट्रेडिंग नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की नजर

    19-Feb-2026
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- नागपुर में अवैध सट्टेबाजी का बड़ा जाल उजागर

 Dabba trading networkImage Source:(Internet) 
नागपुर।
नागपुर में चांदी (Silver) के दामों में हालिया महीनों में आई भारी उछाल और अचानक गिरावट ने पूरे बुलियन बाजार को झकझोर दिया है। अब यह साफ होता जा रहा है कि यह केवल सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चल रही अवैध ‘डब्बा ट्रेडिंग’ और सट्टेबाजी नेटवर्क का परिणाम है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि शहर में संचालित यह नेटवर्क आसपास के क्षेत्रों से आगे बढ़कर विदर्भ के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना तक फैल चुका है। सूत्रों के अनुसार, कई हाई-प्रोफाइल बुक्की विदेश से संचालन कर रहे हैं और मोबाइल ऐप, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व फर्जी ट्रेडिंग आईडी के जरिए लेन-देन हो रहा है, जो सामान्य निवेशकों को अधिकृत व्यापार जैसा दिखाई देता है।
 
करोड़ों के नुकसान से कारोबार और जिंदगी बर्बाद
इस अवैध कारोबार की चपेट में आने से कई व्यापारियों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। पूर्वी नागपुर के एक प्रतिष्ठित मिठाई व रेस्टोरेंट व्यवसायी को चांदी से जुड़ी डब्बा ट्रेडिंग में लगभग 26 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, जिसके चलते उन्हें मुख्य सड़क पर स्थित अपनी व्यावसायिक इमारत भी छोड़नी पड़ी। बताया जा रहा है कि अब वही व्यवसायी अपनी ही संपत्ति में किराए पर व्यापार कर रहे हैं। इतवारी, शंकरनगर, जरीपटका और चंद्रपुर के कई व्यापारियों को भी “आसान मुनाफे” के लालच में करोड़ों का नुकसान हुआ है, लेकिन प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि के डर से अधिकांश ने शिकायत दर्ज नहीं कराई। ज्वेलरी सेक्टर भी इससे अछूता नहीं रहा एक प्रमुख सर्राफा व्यापारी को करीब 11 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि एक साड़ी व्यापारी के बेटे को लगभग 9 करोड़ रुपये की हानि झेलनी पड़ी और उसे मुंबई के बुकियों को किश्तों में भुगतान करना पड़ रहा है।
 
चांदी के दामों में भारी उछाल-गिरावट से बढ़ा संकट
पिछले पांच-छह महीनों में चांदी की कीमत लगभग 1 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 4.2 लाख रुपये तक पहुंच गई और फिर फरवरी के मध्य तक गिरकर करीब 2.39 लाख रुपये रह गई। इस असामान्य उतार-चढ़ाव ने उन व्यापारियों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, जो आधिकारिक एक्सचेंज दरों की बजाय ‘डब्बा रेट’ पर सौदे कर रहे थे। कई मामलों में रात में अवैध दरों पर सौदे हुए और अगले ही दिन कीमतों के उलट जाने से निवेशकों को नुकसान की भरपाई का मौका तक नहीं मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, डब्बा ट्रेडिंग की नींव “जल्दी और ज्यादा मुनाफे” के भ्रम पर टिकी होती है—शुरुआती लाभ से भरोसा बढ़ता है, लेकिन बाजार पलटते ही निवेशक कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, जहां कानूनी सुरक्षा भी उपलब्ध नहीं होती।
 
नियामक एजेंसियों के सामने चुनौती और चेतावनी
इस पूरे प्रकरण ने वित्तीय खुफिया और नियामक एजेंसियों की निगरानी क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इतना बड़ा अवैध कारोबार लंबे समय तक कैसे चलता रहा, यह चर्चा का विषय बन गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वित्तीय झटके सहने की क्षमता की कमी से छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हुए, जबकि बड़े ऑपरेटर मजबूत पूंजी के सहारे संभल गए। अनुमान है कि विदर्भ के एक बड़े डब्बा ऑपरेटर को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, फिर भी वह आर्थिक समर्थन के कारण टिक पाया। यह पूरा घटनाक्रम चेतावनी देता है कि चांदी में अवैध सट्टेबाजी अब केवल बाजार जोखिम नहीं, बल्कि कारोबार, परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।