सेंट्रल जेल में मनाई गई शिवाजी जयंती! बनाया इको फ्रेंडली शिवनेरी किला

    19-Feb-2026
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Shivaji Jayanti
 Image Source:(Internet)
नागपुर।
छत्रपति शिवाजी (Shivaji) महाराज की जयंती के अवसर पर एक अनूठी पहल देखने को मिली, जब जेल के कैदियों ने पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से शिवनेरी किला की प्रतिकृति तैयार की। यह किला शिवाजी महाराज का जन्मस्थान है और मराठा इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह पहल महाराष्ट्र कारागार विभाग की सुधारात्मक नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कैदियों को सकारात्मक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ना है। जेल परिसर में उपलब्ध प्राकृतिक और टिकाऊ सामग्रियों से बनाई गई इस प्रतिकृति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया और कैदियों की कलात्मक प्रतिभा को सामने लाने का अवसर दिया। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से कैदियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलती है।
 
हिंदवी स्वराज्य के शिल्पकार को रचनात्मक श्रद्धांजलि
19 फरवरी 1630 को जन्मे शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना कर भारतीय इतिहास में नई दिशा दी। उन्होंने 350 से अधिक किलों का निर्माण या अधिग्रहण कर उन्हें प्रशासनिक, सैन्य और रणनीतिक केंद्रों के रूप में विकसित किया। इन किलों ने मराठा शक्ति को मजबूत आधार प्रदान किया और शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया। शिवनेरी किला, जहां उनका जन्म हुआ, आज भी महाराष्ट्र की गौरवशाली विरासत का प्रतीक माना जाता है। जेल प्रशासन के अनुसार, इस प्रतिकृति का निर्माण शिवाजी महाराज के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ कैदियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने के उद्देश्य से किया गया।
 
पहले भी मिल चुकी है उपलब्धि
जेल प्रशासन ने बताया कि कैदी पहले भी ऐतिहासिक धरोहरों के मॉडल तैयार कर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। इससे पहले कैदियों ने रायगढ़ किला का मॉडल बनाकर शहर स्तर की प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया था। इस उपलब्धि के लिए उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और 21 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह सम्मान नितिन गडकरी ने प्रदान किया था। इस सफलता ने कैदियों के उत्साह को और बढ़ाया तथा उन्हें अपनी रचनात्मक क्षमता को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।
 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा परिसर
शिवाजी जयंती के उपलक्ष्य में जेल परिसर में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। पुलिस दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग नागपुर के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने कैदियों को शिवाजी महाराज के जीवन, कार्य और नेतृत्व पर व्याख्यान दिया। इसके साथ ही शिवगीत और पारंपरिक पोवाड़ा गायन की प्रस्तुतियों ने माहौल को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बना दिया। कार्यक्रमों का उद्देश्य कैदियों को इतिहास से जोड़ना और उनके भीतर सांस्कृतिक चेतना विकसित करना था।
 
सामाजिक सहभागिता और सहयोग से सफल आयोजन
जेल स्टाफ क्वार्टर में रहने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए भी चित्रकला, निबंध लेखन और रंगोली जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसके साथ ही शिवाजी महाराज के आदर्शों और योगदान पर आधारित सांस्कृतिक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस पहल को श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्तान नागपुर के प्रतिनिधियों का सहयोग मिला, जबकि कैदियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। नागपुर में आयोजित इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि रचनात्मकता और सकारात्मक प्रयास किसी भी परिस्थिति में जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे, ताकि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और सुधारात्मक पहल दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सके।